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भारत में पहली बार: मां का दूध ले जाने के लिए बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर

ब्रेस्ट मिल्क को बेहद कम तापमान में ही सुरक्षित रखा जा सकता है, लेकिन राजस्थान में गर्मी की वजह से इन दिनों तापमान 45 डिग्री से 50 डिग्री के बीच रहता है। इस लिहाज से ये काम बेहद चुनौतीपूर्ण था।

नवजात के लिए मां का दूध अहम होता है।

राजस्थान में प्रशासनिक सहयोग से पहली बार एक कारनामा किया गया। दरअसल यहां मां के दूध को भीलवाड़ा से अजमेर ले जाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। ग्रीन कॉरिडोर अमूमन मानव अंगों को ले जाने के लिए बनाया जाता है। बुधवार (31 मई) को भीलवाड़ा प्रशासन ने अजमेर प्रशासन के सहयोग से 62 लीटर ब्रेस्ट मिल्क की डिलीवरी करवाई। इसके लिए 150 किलोमीटर की दूरी को मात्र 2 घंटे में कवर किया गया। प्रशासन और डॉक्टरों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण था माइनस 20 डिग्री के तापमान में मां के दूध को भीलवाड़ा से अजमेर ले जाना। बता दें कि ब्रेस्ट मिल्क को बेहद कम तापमान में ही सुरक्षित रखा जा सकता है, लेकिन राजस्थान में गर्मी की वजह से इन दिनों तापमान 45 डिग्री से 50 डिग्री के बीच रहता है। इस लिहाज से ये काम बेहद चुनौतीपूर्ण था। अंग्रेजी वेबसाइट एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक भीलवाड़ा के कलेक्टर आनंदीलाल वैष्णव ने इस काम को सफल बनाने के लिए रास्ते में पड़ने वाले सभी टोल प्लाजा से पहले ही क्लीयरेंस ले ली थी।

रास्ते की परेशानियों की दूर करने के लिए दूध से भरे एयरकंडीशन्ड वैन के साथ-साथ पुलिस की एक एस्कॉर्ट गाडी भी साथ चल रही थी। अधिकारी आनंदी लाल वैष्णव के मुताबिक पूरे ट्रैफिक मूवमेंट की जीपीएस से निगरानी की जा रही थी, ताकि इस काम को सफलता पूर्वक अंजाम दिया जा सके। अजमेर के सरकारी अस्पताल में मां के दूध के का कोई बैंक नहीं है। लेकिन अजमेर अस्पताल को इसकी जरूरत थी, जब अस्पताल के अधिकारियों ने इस बारे में भीलवाड़ा अस्पताल से संपर्क किया तो यहां पर दूध तो उपलब्ध था लेकिन इस गर्मी में दूध को 150 किमी लाना समस्या थी।

राज्य सरकार के मिल्क बैंक प्रोजेक्ट के सलाहकार देवेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि, अजमेर में शिशु मृत्यु दर ज्यादा और यहां पर दूध की किल्लत भी रहती है, इसलिए हमनें भीलवाड़ा से दूध ट्रांसपोर्ट करने का फैसला किया। डॉक्टरों के मुताबिक मां के दूध से शिशु मृत्यु दर में 16 से 22 फीसदी की कमी आ सकती है इस लिहाज से ये योजना काफी सफल रह सकती है। राजस्थान में 3,500 माताओं ने स्वेच्छा से अपना दूध मिल्क बैंक को देने का फैसला किया है। महिलाओं का ये फैसला शिशुओं के लिए वरदान साबित हुआ है।

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