बाड़मेर जिले में मंगलवार को शिव विधानसभा सीट से विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह की कोशिश की। इससे पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए लेकिन पुलिस अधिकारियों ने समय रहते भाटी को पकड़ लिया।
मजदूरों की मांगों को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी अपने काफिले के साथ मंगलवार दोपहर गिरल गांव से कलेक्ट्रेट की ओर निकले। कलेक्ट्रेट से एक किमी. पहले पुलिस ने बसें लगाकर भाटी के काफिले को रोक दिया।
काफिला रोके जाने के बाद विधायक भाटी पैदल ही अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंच गए और यहां पुलिस से धक्का-मुक्की के बीच उन्होंने खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। भाटी ने सोमवार को इस बात का ऐलान किया था कि अगर मजदूरों की मांगें नहीं मानी जाती हैं तो वे आंदोलन करेंगे।
राजस्थान के बाड़मेर में गिरल लिग्नाइट माइंस के बाहर पिछले 39 दिनों से मजदूर अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गिरल माइंस क्षेत्र में खनन कार्य होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा। उनका आरोप है कि बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड द्वारा थुंबली गिरल समेत आसपास के इलाकों में जमीन अधिग्रहण की गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी ने नौकरी देने का वादा किया था लेकिन अब बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं, जिन्हें काम से हटाया जा रहा है। इस वजह से किसान और गांव के लोग 9 अप्रैल से गिरल गांव में धरने पर बैठे हुए हैं।
धरना दे रहे लोगों की मांग है कि 8 घंटे की ड्यूटी लागू की जाए और नौकरी के लिए स्थानीय लोगों को वरीयता दी जाए। गिरल लिग्नाइट माइंस बाड़मेर जिले के थुम्बली और गिरल गांव में है।
कौन हैं रविंद्र सिंह भाटी?
रविंद्र सिंह भाटी जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (जेएनवीयू) में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के द्वारा टिकट दिए जाने से इनकार करने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता। इसके बाद वह बाड़मेर की लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़े, बीजेपी ने उन्हें मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह पीछे नहीं हटे। हालांकि उन्हें चुनाव में हार मिली लेकिन उन्होंने बाड़मेर में भाजपा के उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को कड़ी टक्कर दी थी।
स्थानीय मुद्दों को उठाने की वजह से रविंद्र सिंह भाटी की लोकप्रियता में इजाफा हुआ है। भाटी ने निजी कंपनियों में स्थानीय लोगों के लिए आरक्षण की मांग की, बेरोजगारी, पानी की कमी, बिजली कटौती आदि मामलों को जोर-शोर से उठाया है।
