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शिक्षकों के अभाव में कम्प्यूटर शिक्षा का हाल बेहाल

देश में जहां कम्प्यूटर शिक्षा आज के विद्यार्थियों के लिए जरूरी है, वहीं प्रदेश के 14 हजार 147 सरकारी सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी स्कूलों में एक भी स्थायी कम्प्यूटर शिक्षक तैनात नहीं है।

Author February 13, 2019 6:37 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षकों के नहीं होने से इस जरूरी शिक्षा का हाल बेहाल है। ऐसे हालात में प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया मुहिम को राजस्थान के सरकारी स्कूल मुंह ही चिढ़ाते दिख रहे हैं। देश में जहां कम्प्यूटर शिक्षा आज के विद्यार्थियों के लिए जरूरी है, वहीं प्रदेश के 14 हजार 147 सरकारी सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी स्कूलों में एक भी स्थायी कम्प्यूटर शिक्षक तैनात नहीं है। स्थायी शिक्षक नहीं होने के बावजूद सरकारी स्कूलों में कम्प्यूटर विषय को अनिवार्य विषय के तौर पर पढाया जा रहा है और छात्रों का इसमें मूल्यांकन होने के साथ उसका परिणाम भी जारी किया जा रहा है। दूसरी तरफ केंद्र से लेकर राज्य सरकार अपने तंत्र को पूरी तरह से डिजिटल करने में जुटी हुई है।

राज्य में पांच साल में सरकार ने स्कूलों की कम्प्यूटर शिक्षा की तरफ कोई ध्यान ही नहीं दिया जबकि सेकंडरी स्तर से ही कम्प्यूटर शिक्षा को अनिवार्य विषय के तौर पर शामिल किया गया था। प्रदेश में कुछ वर्षों में सरकार ने इस पर कोई ध्यान ही नहीं दिया और नतीजे में डिजिटलाइजेशन के लिए दी जाने वाली इस शिक्षा में राजस्थान की बुनियाद बेहद ही कमजोर हो चुकी है। इसमें प्रदेश के सरकारी स्कूल इस कदर पिछड़ गए हैं कि आधे से ज्यादा सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी स्कूलों में कम्प्यूटर ही नहीं है और जहां हैं वहां धूल फ ांक रहे हैं। इन तमाम स्कूलों में कम्प्यूटर की शिक्षा देने वाला शिक्षक ही नहीं है। प्रदेश में सन 2014 तक तो स्कूलों में अस्थायी तौर पर कम्प्यूटर शिक्षकों की तैनाती रही थी। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने इन्हें हटा दिया था। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से प्रदेश के 14 हजार 147 स्कूलों में से आठ हजार 500 में आइसीटी फेज छह के तहत कम्प्यूटर लैब स्थापित की गई थीं।

सरकारी स्कूलों की ये कम्प्यूटर प्रयोगशालाएं अब सिर्फ सजावटी हो गई हैं। सरकारी स्कूलों की दस साल पुरानी प्रयोगशालाएं अब रख-रखाव के अभाव में कबाड़ हो गई हैं और कम्प्यूटर पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। सरकारी स्कूलों की कम्प्यूटर शिक्षा की बेहाली के लिए विशेषज्ञ सरकार की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराते हैं।

राजस्थान कम्प्यूटर शिक्षक संघ के महासचिव मुकुल आचार्य का कहना है कि स्कूलों में 2014 तक बीसीए, एमसीए, पीजीडीसीए, बीटेक, एमटेक जैसी योग्यता रखने वाले शिक्षक अस्थायी तौर पर विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे। पर उस समय की सरकार ने एक ही आदेश के तहत इन अस्थायी शिक्षकों को चलता कर दिया। इन अस्थायी शिक्षकों ने स्थायी करने की मांग भी सरकार के सामने रखी थी। कम्प्यूटर की गुणवत्ता युक्त शिक्षा छात्रों को दिया जाना जरूरी है।
दूसरी तरफ प्रदेश के शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि नई सरकार सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की कम्प्यूटर शिक्षा पर पूरा ध्यान देगी। इस शिक्षा को उच्च गुणवत्ता वाला बनाया जाएगा। कम्प्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने वाले सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इसमें स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षकों की तैनाती की समस्या का समाधान भी किया जाएगा।

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