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राजस्थान: Ranthambore National Park में बाघ ने युवक को मार डाला, लोगों को घरों में दुबके रहने की सलाह

यहां वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट ने मृतक युवक के आश्रितों को 4 लाख रुपया मुआवजा देने का ऐलान भी किया है।

TIGER, TIGER KILLED MANहमला करने वाले बाघ की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। फाइल फोटो। फोटो सोर्स – (Express photo by Shruti Dua)

जस्थान के मशहूर Ranthambore National Park में बाघ ने एक युवक को मार डाला। इस घटना के बाद पार्क के आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को घरों में दुबके रहने की सलाह दी गई है। बताया जा रहा है कि बाघ के द्वारा युवक को मारने की यह घटना Baler Range की है। न्यूज एजेंसी ‘ANI’ के मुताबिक Baler Range के अधिकारियों ने कहा है कि ‘हमने गांव के लोगों को सूचिता किया था और उनसे घऱो में रहने के लिए कहा गया है। इस बाघ के गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक टीम का गठन किया गया है।

बताया जा रहा है कि पार्क में बाघ के हमले की यह घटना गुरुवार दोपहर की है। राष्ट्रीय उद्यान के फिल्ड डायरेक्टर टिकम चंद वर्मा ने कहा कि उद्यान प्रशासन को बाघ के हमले की जानकारी पेट्रोलिंग टीम के जरिये मिली है। पेट्रोलिंग टीम ने बताया है कि मृतक खंदर क्षेत्र के कानेदी गांव के रहने वाले थे। मृतक व्यक्ति की पहचान 40 साल के पप्पू गुर्जर के रूप में हुई है। हालांकि अभी हमलावर बाघ की पहचान नहीं हो पाई है। कानेदी गांव रेवेन्यू लैंड पर है और यह पार्क के परिधि में आता है। यहां पेट्रोलिंग टीम ने गांव के लोगों को सलाह दी है कि बाघ उनके घर के आसपास आ सकता है लिहाजा वो बेहद सतर्क रहें।

उद्यान प्रशासन का यह भी कहना है कि बाघ ने इंसान पर हमला जरुर किया है लेकिन शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि उसने युवक को मारने के बाद उसे खाया नहीं था। यहां वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट ने मृतक युवक के आश्रितों को 4 लाख रुपया मुआवजा देने का ऐलान भी किया है। फिलहाल उद्यान में हमलावर बाघ की पहचान करने की कोशिशें जारी हैं।

बता दें कि रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान उत्तर भारत में सबसे बड़ा वन्यजीव संरक्षण स्थल है। यह राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक है। वर्ष 1955 में यह वन्यजीव अभयारण्य के रूप में स्थापित हुआ। बाद में 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के पहले चरण में इसको शामिल किया गया। इस अभयारण्य को 1981 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्रदान किया गया था। बाघों के अलावा यह राष्ट्रीय अभयारण्य विभिन्न जंगली जानवरों, सियार, चीते, लकड़बग्घा, दलदली मगरमच्छ, जंगली सुअर और हिरणों की विभिन्न प्रजातियों के लिए एक प्राकृतिक निवास स्थान उपलब्ध कराता है।

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