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भरतपुर के ब्रज विश्वविद्यालय का मामला: भाजपा के दखल से आहत कुलपति का इस्तीफा

राजभवन के प्रवक्ता ने बताया कि कुलपति का त्यागपत्र मंजूर कर लिया गया है और उसे राज्य सरकार के पास भेज दिया गया है।

Author जयपुर | Updated: April 13, 2016 2:38 AM
भरतपुर का महाराजा सूरजमल ब्रज विश्वविद्यालय

भरतपुर के महाराजा सूरजमल ब्रज विश्वविद्यालय के कुलपति ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जाता है कि भाजपा के विधायक की ओर से बोर्ड प्रबंधन कमेटी की बैठक में उन पर की गई कथित टिप्पणियों से आहत होकर उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दिया। उधर राजभवन के प्रवक्ता ने बताया कि कुलपति का त्यागपत्र मंजूर कर लिया गया है और उसे राज्य सरकार के पास भेज दिया गया है।

प्रबंधन कमेटी की बैठक गत नौ अप्रैल को हुई थी, जिसमें भाजपा विधायक विजय बंसल ने बिना बैठक के बिंदुओं की मंजूरी के आपातकालीन बैठक बुलाए जाने पर आपत्ति की थी। उन्होंने विश्वविद्यालय में सहायक रजिस्ट्रार और उपरजिस्ट्रार के पदों पर चल रही नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे। बताया जाता है कि विधायक सहायक रजिस्ट्रार और उपरजिस्ट्रार की नियुक्ति प्रक्रिया में दबाव डाल रहे थे और बाधा पैदा कर रहे थे।

कुलपति केडी स्वामी ने मंगलवार को बताया कि दोनों पदों की नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा पिछले साल अगस्त में कराई गई थी। गत 29 मार्च को पांच सदस्यीय एक कमेटी ने चुने गए अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया था। गत शनिवार को एक विशेष बैठक साक्षात्कार में चुने गए अभ्यर्थियों के नामों का खुलासा करने के लिए बुलाई गई थी। विधायक ने बैठक में इसका विरोध करते हुए लिफाफे को नहीं खोलने दिया।

बैठक में तीन एजंडे थे लेकिन बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। स्वामी ने कहा कि इस घटनाक्रम से आहत होकर उन्होंने कुलाधिपति व राज्यपाल कल्याण सिंह को अपना त्यागपत्र भेज दिया। कुलपति ने त्यागपत्र निजी कारणों से देना बताया है। विश्वविद्यालय में 2013 में कुलपति की नियुक्ति की गई थी।

दूसरी ओर विधायक विजय बंसल ने कुलपति की तरफ से लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने मामले में हुए भ्रष्टाचार की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कुलपति ने विशेष बैठक पांच अप्रैल को बुलाई थी। तब विधानसभा सत्र चलने के कारण वह बैठक में शामिल नहीं हो सकते थे इसलिए उन्होंने तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया था। लेकिन कुलपति ने तारीख बढ़ाने से मना कर दिया। तब बंसल ने ध्यानाकर्षण के जरिए मामले को विधानसभा में उठाया।

विधानसभा अध्यक्ष ने संसदीय कार्यमंत्री से बैठक को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। फिर भी कुलपति ने यह कहते हुए पांच अप्रैल की बैठक को निरस्त नहीं किया कि वे राज्यपाल के अधीन हैं। बाद में राज्यपाल के हस्तक्षेप के बाद बैठक निरस्त की गई और गत शनिवार नौ अप्रैल को छुट्टी वाले दिन बैठक बुलाई गई। बंसल के अनुसार उन्होंने बैठक में चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। यह कोई दबाव नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलपति ने त्यागपत्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच के डर से दिया है।

* प्रबंधन कमेटी की बैठक नौ अप्रैल को हुई थी, जिसमें भाजपा विधायक विजय बंसल ने बिना बैठक के बिंदुओं की मंजूरी के आपातकालीन बैठक बुलाए जाने पर आपत्ति की थी।
* उन्होंने विश्वविद्यालय में सहायक रजिस्ट्रार और उपरजिस्ट्रार के पदों पर चल रही नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए थे।
* बताया जाता है कि विधायक सहायक रजिस्ट्रार और उपरजिस्ट्रार की नियुक्ति प्रक्रिया में दबाव डाल रहे थे और बाधा पैदा कर रहे थे।
* शनिवार को एक विशेष बैठक साक्षात्कार में चुने गए अभ्यर्थियों के नामों का खुलासा करने के लिए बुलाई गई थी। विधायक ने बैठक में इसका विरोध करते हुए लिफाफे को नहीं खोलने दिया।

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