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आतंक पीड़ितों की मदद के लिए युवती गई थी काबुल, ब्लास्ट में हुई मौत, आज घर पहुंचेगा शव

जोधपुर निवासी शिप्रा अब इस दुनिया में नहीं है। काबुल में हुए एक आंतकी हमले में जोधपुर की इस बेटी की जान चली गई। वह आतंकवाद से पीड़ित परिवारों की मदद करने के लिए 3 महीने पहले काबुल पहुंचीं थी।

काबुल में बम धमाके में शिप्रा की मौत हो गई फोटो सोर्स- ट्विटर

राजस्थान के जोधपुर निवासी शिप्रा अब इस दुनिया में नहीं है। काबुल में हुए एक आंतकी हमले में जोधपुर की इस बेटी की जान चली गई। वह आतंकवाद से पीड़ित परिवारों की मदद करने के लिए 3 महीने पहले काबुल पहुंचीं थी। शिप्रा का शव (आज) शुक्रवार को जोधपुर पहुंचेगा। बता दें कि शिप्रा नए साल में जोधपुर आई थी जिसके बाद 13 जनवरी को वापस काबुल के लिए रवाना हुई थी।

बता दें कि जोधपुर के कृष्ण नगर निवासी पवन शर्मा की बेटी शिप्रा शर्मा (35) लंबे समय से मुंबई के एनजीओ से जुड़ी हुई थी। वह अक्टूबर 2018 में काबुल पहुंचीं थी। जहां वह सेवा के जज्बे से आतंक पीड़ितों की मदद करती थी। बताया जा रहा है कि शिप्रा अफगानिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर सिविल सोसायटी के साथ बतौर डायरेक्टर सर्टिफिकेशन के रूप में काम शुरू किया। 14 जनवरी को उन्होंने मां आशा शर्मा से वीडियो कॉल कर बात भी की थी। लेकिन इसके बाद रात 8 बजे आरडीएक्स से भरा ट्रक उनकी बिल्डिंग से टकरा गया। जिसके बाद हुए बड़े धमाके में शिप्रा की बिल्डिंग के मलबे में दबने से मौत हो गई। ये हमला चार दिन पहले हुआ था।

राजस्थान कांग्रेस ने ट्वीट करते हुए लिखा, “अफगानिस्तान के काबुल में आतंकी हमले में जोधपुर की शिप्रा शर्मा की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हैं| ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति एवं शोकाकुल परिजनों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।”

अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास से शिप्रा की मौत की खबर भारत उनके परिवार को भेज दी गई। परिवार ने भारत सरकार से मदद मांगी जिसके बाद शिप्रा के शव को काबुल से रिलीज कर दिया गया और आज शव जोधपुर पहुंचेगा।

बता दें कि शिप्रा ने चेन्नई की अन्नामलाई यूनिवर्सिटी व लंदन की स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रिकन स्टडीज से एनवायरमेंटल इकोनॉमिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की थी। शिप्रा को मुंबई के एनजीओ में काम करने वाले साथी ने अफगानिस्तान की राह सुझाई थी। इस पर उन्होंने एनजीओ की जानकारी जुटाई और वहां जाने की ठान ली। जब परिजनों ने कहा कि वहां हर जगह आतंकवाद है। तुम्हारे साथ कुछ हो सकता है इस पर शिप्रा का जवाब था कि बम धमाकों से क्या डरना मौत तो कहीं भी आ सकती है। बता दें वह बीते तीन महीने से वह काबुल में अफगानिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर सिविल सोसायटी के साथ डायरेक्टर के रूप में काम कर रहीं थी। बताया जा रहा है कि शिप्रा ने एक एनजीओ के कम्युनिटी बिजनेस सपोर्ट में प्रोग्राम मैनेजर बन कर निर्धन परिवारों के लिए भी काम किया था।

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