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सरकार की अनदेखी से सौर ऊर्जा में पिछड़ता राज्य

सरकार के स्तर पर भी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हो रही प्रगति की समीक्षा की जाती है पर उसका कोई सकारात्मक नतीजा अब तक नहीं आया है। लिहाजा प्रदेश में सोलर पार्क विकसित करने की दिशा में कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया गया है। ऊर्जा विकास निगम की मनमानी के कारण सौर और पवन ऊर्जा के 600 मेगावाट क्षमता के संयंत्र संचालन की नवीनीकरण प्रक्रिया अटक गई है।

Author जयपुर | Updated: August 21, 2019 4:14 AM
राजस्थान का रेगिस्तानी इलाका सौर ऊर्जा के लिए खुला मैदान है। सूर्य की तेज किरणों का लाभ उठाने के लिए ही राजस्थान सरकार ने 2014 में सौर ऊर्जा नीति बनाई थी। इस नीति पर सही तरीके से अमल होता तो इसका फायदा राजस्थान को मिलने लगता। इसको गति देने का काम राज्य अक्षय ऊर्जा विकास निगम को करना था।

सौर ऊर्जा के मामले में राजस्थान पिछड़ रहा है। राज्य में 25 हजार मेगावाट बिजली अकेले सौर ऊर्जा के जरिए प्राप्त की जा सकती है। लेकिन सरकार की अनदेखी और उदासीनता के कारण सौर ऊर्जा के मामले में प्रदेश में कोई कारगर काम नहीं हो पा रहा है। वहीं, सरकारी अड़ंगेबाजी के कारण निजी कंपनियां भी इस काम में हाथ डालने से कतराने लगी हैं। देश में सौर ऊर्जा उत्पादन के मामले में गुजरात पहले नंबर पर और राजस्थान दूसरे। राजस्थान में अब तक 1993 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लग चुके हैं। सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना कम लागत में हो जाती है और इनसे महंगी बिजली का उत्पादन आसानी से किया जा सकता है। राजस्थान का रेगिस्तानी इलाका सौर ऊर्जा के लिए खुला मैदान है। सूर्य की तेज किरणों का लाभ उठाने के लिए ही राजस्थान सरकार ने 2014 में सौर ऊर्जा नीति बनाई थी। इस नीति पर सही तरीके से अमल होता तो इसका फायदा राजस्थान को मिलने लगता। इसको गति देने का काम राज्य अक्षय ऊर्जा विकास निगम को करना था।

सरकार के स्तर पर भी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हो रही प्रगति की समीक्षा की जाती है पर उसका कोई सकारात्मक नतीजा अब तक नहीं आया है। लिहाजा प्रदेश में सोलर पार्क विकसित करने की दिशा में कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया गया है। ऊर्जा विकास निगम की मनमानी के कारण सौर और पवन ऊर्जा के 600 मेगावाट क्षमता के संयंत्र संचालन की नवीनीकरण प्रक्रिया अटक गई है। इसके नवीनीकरण का आदेश विद्युत नियामक आयोग दे चुका है पर विकास निगम इसे जारी नहीं कर रहा है। कंपनियों का कहना है कि संयंत्र की अवधि 25 साल है और उसी आधार पर लागत लगाई गई है। जबकि निगम 6 साल बाद ही नवीनीकरण करने से इनकार कर रहा है। नियामक आयोग ने इस साल 5 मार्च को आदेश देकर नवीनीकरण करने का निर्देश दिया था। प्रदेश की मौजूदा सरकार इस दिशा में नीति बना कर काम तो कर रही है पर नौकरशाही के अड़ंगेबाजी के कारण इसमें तेजी नहीं आ पा रही है। रेगिस्तानी इलाके में लोगों को रोजगार मुहैया कराने में भी सौर ऊर्जा क्षेत्र बड़ा साधन हो सकता है।

राजस्थान में सरकार ने राज्य अक्षय ऊर्जा निगम बना कर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का अभियान चला रखा है। प्रदेश में जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर के साथ ही जालोर जिला सौर ऊर्जा के बड़े केंद्र हो सकते है। बिजली विशेषज्ञ आर पी गुप्ता का कहना है कि इन जिलों में सरकार निजी लोगों को भूमि उपलब्ध करवा कर सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना करवाने में पहल करें। निजी भूमि खातेदार को भी सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कराने के लिए कर्ज मुहैया करवा कर इस दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। निजी खातेदार को अपनी भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना की अनुमति देकर बिजली उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। सरकार ने अक्षय ऊर्जा निगम को इस बारे में प्रस्ताव तैयार करने को भी कहा है। ऐसे संयंत्र कम लागत में ही लग जाते हैं और उनकी देखरेख के लिए सिर्फ कुछ तकनीकी विशेषज्ञों की ही जरूरत होती है।

सरकार और निजी क्षेत्र के साझा प्रयासों से सोलर पार्कों का विकास किया जा सकता है। साथ ही इसके लिए सरकार को निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना होगा। राजस्थान में सौर ऊर्जा के माध्यम से इतनी बिजली का उत्पादन किया जा सकता है जिससे पूरे उत्तर भारत में ऊर्जा की पूर्ति हो सकती है।
– संजीव शर्मा, सौर ऊर्जा मामलों के जानकार

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