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राजस्थानः बेटियां बचाने में तो अव्वल, सुरक्षा देने में फिसड्डी

कभी कोख में ही कन्या को मार डालने में बदनाम राजस्थान अब इससे उबर गया है पर उनके प्रति हिंसा को रोकने में उसकी कमजोरी साबित हो रही है।

Author जयपुर | January 31, 2018 1:30 AM

कभी कोख में ही कन्या को मार डालने में बदनाम राजस्थान अब इससे उबर गया है पर उनके प्रति हिंसा को रोकने में उसकी कमजोरी साबित हो रही है। प्रदेश में एक तरफ जहां लिंगानुपात में काफी सुधरा है, वहीं महिला प्रताड़ना और दुष्कर्म के मामलों में उसे बदनामी झेलनी पड़ रही है। तीन सालों में बेटियां बचाने में तो देशभर में अव्वल दर्जा पाने वाला राज्य महिलाओं को हिंसा से बचाने में नाकाम रहा है। महिला प्रताड़ना के मामले तो बढ़ रहे हैं और इन्हें रोकने में विफलता ही हाथ लग रही है।

प्रदेश में महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद महिला सुरक्षा के मामले में लगातार पिछड़ने से महिला और जनसंगठनों में गहरी नाराजगी भी दिखाई देती है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के वर्ष 2016 के हाल में जारी आंकड़ों के मुताबिक महिला प्रताड़ना के मामलों में राजस्थान देशभर में दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में महिला प्रताड़ना के कुल 13811 मामले दर्ज किए गए हैं। देशभर में महिला अपराध में राजस्थान पांचवें स्थान पर है। देश में हुए महिलाओं के प्रति कुल अपराध का छह फीसद से ज्यादा राजस्थान में दर्ज किया गया है। दुष्कर्म के मामलों में तो राजस्थान की हालत चिंताजनक है। ब्यूरो के आंकड़ों के हिसाब से तो दुष्कर्म के मामलों में तो राजस्थान देश भर में तीसरे स्थान पर है। वर्ष 2016 में देश में दर्ज 1903 में से 159 मामले प्रदेश में दर्ज हुए हैं। स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के हिसाब से 2017 में भी महिला अपराधों में खासी बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

राजस्थान में लिंगानुपात सुधारने पर सरकार पीठ थपथपा रही है। प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा का सवाल लगातार गहरा रहा है। इस दिशा में महिला बाल विकास विभाग, राज्य महिला आयोग और पुलिस की संवेदनशीलता कहीं नजर नहीं आती है। लिंगानुपात सुधार तो समाज की जागरूकता का नतीजा माना जाता है। शिक्षा का स्तर सुधरने के साथ ही लोग अब बेटे और बेटी को एक समान मान कर उनकी परवरिश कर रहे हैं।

सरकार की योजनाओं की बदौलत लिंगानुपात सुधरा और पिछले तीन वर्षों में बेटियों की संख्या सबसे ज्यादा देश में राजस्थान में ही बढ़ी है। हालांकि महिला सुरक्षा के बारे में जो स्थितियां है वे चिंताजनक हैं। इनमें सुधार के लिए सरकार की तरफ से लगातार बैठकें की जाती हैं।
-अनीता भदेल, महिला बाल विकास मंत्री

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