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अब राजस्‍थान में भी नौकरियों में स्‍थानीय लोगों को मिलेगी तरजीह, एमपी में हो चुका है विवाद

मीणा से पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी ऐसा ही बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उन उद्योगों को इन्सेंटिव दिया जाएगा जो अपने यहां 70 फीसदी स्थानीय लोगों को नौकरी पर रखेंगे।

राजस्थान सरकार में उद्योग मंत्री ने कहा है कि नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देनी होगी. (फोटो सोर्स: पीटीआई)

मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान में भी स्थानीय लोगों को नौकरियों में तरजीह देने का विवाद छिड़ गया है। सोमवार को राजस्थान के उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा ने राज्य के लोगों को नौकरियों में वरियता देने की बात कही। उन्होंने कहा, “हम निवेशकों के लिए ऐसी पॉलिसी लाएंगे जिससे उनकी हर संभव मदद होगी। लेकिन, उनको इसके लिए राजस्थान के लोगों को नौकरियों में प्राथमिकता देनी होगी। यह हमारी पहली शर्त होगी।” मीणा ने यह बात अपने कार्यकाल के पहले दिन सचिवालय स्थित अपने दफ्तर में कही।

मीणा से पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी ऐसा ही बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उन उद्योगों को इन्सेंटिव दिया जाएगा जो अपने यहां 70 फीसदी स्थानीय लोगों को नौकरी पर रखेंगे। कमलनाथ के इस बयान के बाद राजनीतिक पारा चरम पर चला गया और जमकर नारेबाजी हुई। गौरतलब है कि दोनों ही राज्यों में कांग्रेस ने नई-नई सरकार बनाई है। राजस्थान में भी इस बयान ने कई मोर्चों पर राजनीति शुरू कर दी है।

राजस्थान के उद्योग मंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों अब दूसरे प्रांतों में नौकरियों के लिए नहीं जाना होगा। नई औद्योगिक नीति बनाई जा रही है जिससे उनका रोजगार यहीं सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा, “नई उद्योग नीति में निवेशकों का भी खास ख्याल रखा जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उन्हें भी कोई परेशानी ना हो और यह काम विशेष समयावधि के बीच में पूरा किया जाएगा।” उद्योग मंत्री मीणा ने राजस्थान में कम निवेश के पीछे बीजेपी की नीतियों को कसूरवार बताया। उन्होंने बताया पूर्व की बीजेपी सरकार में इच्छा शक्ति की कमी थी। हम राजस्थान में कम निवेश की समीक्षा करेंगे। मगर, हम बहुत जल्द एक बेहतर उद्योग नीति लाएंगे जिसमें नौकरी हासिल करने वालों से लेकर उद्योग लगाने वालों के हित की बातें शामिल होंगी।

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