ताज़ा खबर
 

राजस्थानः एक अकेली लैब कैसे उठाए जांच का बोझ

राजस्थान में नकली दवाओं की जांच के लिए एक ही ड्रग टेस्टिंग लैब होने से यह धंधा प्रदेश में खूब फल फूल रहा है।
Author January 3, 2018 01:59 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

राजीव जैन

राजस्थान में नकली दवाओं की जांच के लिए एक ही ड्रग टेस्टिंग लैब होने से यह धंधा प्रदेश में खूब फल फूल रहा है। सरकार ने प्रदेश के तीन बडे़ शहरों में लैब स्थापित करने का फैसला तो काफी पहले किया था, पर उन्हें शुरू करने के लिए उसके पास न मशीनरी है और न स्टाफ। जयपुर की एकमात्र लैब का आलम यह है कि वहां कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ के ज्यादातर पद खाली हैं। इसके चलते दवाओं के सैंपल जांच की रिपोर्ट आने में इतना समय लग जाता है कि तब तक वह दवा हजारों मरीज तक पहुंच जाती है।
राज्य में दवाओं के सैंपल की जांच के लिए एकमात्र सरकारी प्रयोगशाला जयपुर में है। प्रदेश में अकेली लैब होने से राज्य भर से लिए गए दवाओं के नमूनों की जांच का भार यह उठा रही है। इसका नतीजा है कि दवा जांच की रिपोर्ट आने में काफी वक्त लग जाता है। इस लैब की क्षमता भी एक महीने में सिर्फ 300 सैंपल्स जांचने की है।

इसके चलते लैब में जांच के लिए आई दवा की सूची बढ़ती ही जा रही है। इस सरकारी प्रयोगशाला में कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि पिछले दस सालों में हालत यह हो गई कि करीब पांच हजार दवाओं के नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। प्रदेश में ड्रग कंट्रोल विभाग दवाओं की जांच-पड़ताल कर उनके नमूने उठाता है। इसके बाद विभाग इन दवाओं को जांच के लिए जयपुर की सरकारी प्रयोगशाला में भेजता है। विभाग का कहना है कि जब जांच रिपोर्ट आएगी और उसमें तय मानकों पर दवा फेल होगी तभी संबंधित दवा कंपनी के खिलाफ कानूनी कारर्वाई की जाएगी।

प्रदेश के पूर्व ड्रग कंट्रोलर आरसी शर्मा का कहना है कि एक ही लैब होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। दवाओं की लगातार सैंपलिंग का प्रावधान है। इसके लिए विशेष अभियान भी चलाए जाते हैं। सरकार ने तीन नई प्रयोगशालाओं को मंजूरी दे दी है और उनके भवन भी बन गए हैं। इन्हें जल्द शुरू कर नकली दवाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।
सजा का प्रावधान
नकली दवाओं के मामले में दोषी पाए जाने पर सख्त सजा का प्रावधान है। दवाओं के कारोबार से जुडे़ अजय अग्रवाल का कहना है कि नकली दवा मामले में उम्रकैद और दस लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। प्रदेश में कई बार नकली दवाओं का जखीरा पकड़ा जाता है पर प्रयोगशालाओं की कमी के चलते उनकी जांच रिपोर्ट आने में देरी होती है तो अपराधियों को बचाव का रास्ता आसानी से मिल सकता है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.