जयपुर से सटे रामपुरा-कंवरपुरा गांव के उस सरकारी स्कूल की सूरत बहुत जल्द बदलने वाली है जहां कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका जाने वाले थे, लेकिन ग्रामीणों ने उनके काफिले पर हमला कर दिया था और उन्हें जान बचाकर वहां से भागना पड़ा था। इस हमले के बाद से ही यह स्कूल चर्चाओं में था। अब स्कूल के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए करीब 18 लाख रुपये के खर्च का वादा प्रशासन की ओर से कर दिया गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की टीम ने भी इस स्कूल का दौरा किया था और वहां से कई चीजें निकलकर सामने आई थी। इस स्कूल में बच्चे मवेशियों के बीच बैठकर पढ़ने को मजबूर थे। अब स्कूल के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए होने वाले खर्च का जो वादा सरकार की ओर से किया गया है उससे स्थानीय अभिभावकों को उम्मीद जगी है कि बच्चों को जल्द ही सुरक्षित और बेहतर माहौल में पढ़ने की सुविधा मिल सकेगी।

1 सितंबर से शुरू होगा स्कूल की नई बिल्डिंग का काम

पीटीआई के मुताबिक, राजस्थान सरकार की ओर से जयपुर जिले के सांगानेर प्रखंड के रामपुरा (कंवरपुरा) में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय के नए भवन के निर्माण के लिए 18 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। इसमें से 12 लाख रुपये जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) से तथा छह लाख रुपये विधायक कोष से मंजूर किए गए हैं। 1 सितंबर से स्कूल की नई बिल्डिंग का काम भी शुरू हो जाएगा।

असुरक्षित घोषित हो चुके स्कूल में पढ़ रहे थे बच्चे

बता दें कि सीजेपी के आशुतोष रांका जिस स्कूल में जाना चाहते थे वहां कुल 18 बच्चे पड़ते हैं जो मवेशियों के बीच बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। ऐसी तस्वीरें भी सामने आई थीं जहां बच्चे गाय-बछड़ों के बीच बैठकर पढ़ रहे थे। स्कूल की इमारत को करीब साल भर पहले असुरक्षित घोषित कर दिया गया था, लेकिन उसके बाद भी बच्चे उसी तरह पढ़ने को मजबूर थे। इन बच्चों के पास पढ़ाई के लिए कोई स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं थी।

मीडिया को नहीं जाने दिया था स्कूल के अंदर

अक्सर बारिश के मौसम में इस स्कूल में जिन दो कमरों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा था उसका फर्श कीचड़ से भर जाता था। ऐसे में छोटे बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना और वहां बैठकर पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है। रांका पर हुए हमले के बाद तमाम मीडियाकर्मी इस स्कूल तक पहुंचने लगे तो सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक से जुड़े आदेश का हवाला देते हुए यहां ड्यूटी करने वाले दो शिक्षकों ने कमरे के अंदर जाने या मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया था।

कुछ परिवार इसी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए थे मजबूर

स्कूल की हालत खस्ता होने के बावजूद भी कुछ स्थानीय लोग मजबूर थे कि उनके बच्चे इसी स्कूल में पढ़ रहे थे। स्थानीय निवासी धोरी बैरवा के दो बेटे इसी स्कूल में पढ़ते हैं। बारिश के बीच उन्होंने बुधवार सुबह करीब 9.30 बजे बच्चों को स्कूल भेजा, जबकि कक्षाएं सुबह 8 बजे से शुरू हो जाती हैं। धोरी के पति एक दुकान पर हेल्पर के तौर पर काम करते हैं और वह खुद दिहाड़ी मजदूरी करती हैं। सीमित आमदनी के कारण बच्चों को निजी स्कूल में भेजना उनके लिए आसान नहीं है।

धोरी कहती हैं कि वह अपने बच्चों को इसी स्कूल में इसलिए भेज रही हैं क्योंकि उनके पास दूसरा विकल्प नहीं है। उनके मुताबिक, निजी स्कूलों की फीस कम से कम 1,000 रुपये प्रति माह है, जो उनके परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।

इसी स्कूल का दौरा करने वाले थे रांका

सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका इसी स्कूल के दौरे के लिए गांव में पहुंचे थे। बीते सोमवार को ग्रामीणों ने उनके काफिले पर हमला कर दिया था जिसमें रांका को मौके से अपनी जान बचाकर भागना पड़ा था। इस हमले में गांववालों ने रांका के काफिले की गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए थे। इस दौरान गांववालों ने पत्थरबाजी भी कर दी थी।

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