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राजस्थान में नौकरशाही में फेरबदल की तैयारी

यह कवायद इसलिए की जा रही है क्योंकि प्रदेश के पांच वरिष्ठ आइएएस अधिकारी इस महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुधंरा राजे। (फाइल फोटो)

राजस्थान सरकार ने प्रदेश की नौकरशाही में बड़े पैमाने पर फेरबदल की तैयारी की है। यह कवायद इसलिए की जा रही है क्योंकि प्रदेश के पांच वरिष्ठ आइएएस अधिकारी इस महीने सेवानिवृत्त होने वाले हैं। सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों में केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर तैनात सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव सुनील अरोड़ा भी शामिल हैं। अरोड़ा राजस्थान कैडर के 1980 बैच के आइएएस अधिकारी है।

राज्य में अप्रैल के अंत में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों में अरोड़ा के अलावा सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अजित कुमार सिंह, पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्रीमत पांडे, पर्यटन निदेशक अनिल चपलोत और दौसा के जिला कलक्टर एसएस पंवार हैं। अजित कुमार सिंह 1983 और पांडे 1984 बैच के अधिकारी हैं। चपलोत और पंवार राजस्थान प्रशासनिक सेवा से पदोन्नत आइएएस अधिकारी हैं। प्रदेश के चार महत्त्वपूर्ण महकमों की जिम्मेदारी संभाल रहे आइएएस अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के कारण इनकी जगह पर दूसरे अफसरों को लगाना सरकार के लिए जरूरी हो गया है। कार्मिक विभाग के मुताबिक, प्रदेश में इस साल 16 आइएएस और नौ आइपीएस अफसर सेवानिवृत्त होंगे।

विभाग का कहना है कि अगले तीन महीनों में तो अहम पदों को संभालने वाले आधा दर्जन अफसर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इसलिए सरकार जल्द ही प्रशासनिक फेरबदल करेगी। प्रदेश में सत्ताधारी भाजपा विधायकों का भी सरकार पर दबाव है कि उनके इलाकों के अफसरों को बदला जाए। विधानसभा के पिछले बजट सत्र में भी विधायकों ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से कई जिला कलक्टरों और एसपी की शिकायत की थी। उस समय मुख्यमंत्री ने विधायकों को भरोसा दिया था कि जल्द ही नौकरशाही में फेरबदल किया जाएगा। इसके अलावा राजे के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने जल स्वावलंबन अभियान में कई जिला कलक्टरों के ढिलाई बरतने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

मुख्य सचिव सीएस राजन ने अभियान की धीमी गति पर जिला कलक्टरों से नाराजगी भी जताई थी। मुख्यमंत्री ने भी जब विधायकों से अभियान के बारे में जानकारी हासिल की तो उन्हें जिला कलक्टरों के इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेने की शिकायत मिली। इस पर मुख्यमंत्री राजे ने मुख्य सचिव को ढिलाई बरतने वाले कलक्टरों की सूची बनाने को कहा था। इसी के मद्देनजर इस बार होने वाले फेरबदल में सरकार ने करीब एक दर्जन जिलों के कलक्टर बदलने की तैयारी कर ली है।

राज्य के कई मंत्री भी अपने विभागों में अपनी पसंद के अफसर तैनात कराना चाहते है। मंत्रियों का कहना है कि सरकार का आधा कार्यकाल पूरा हो गया है, अब बचे समय में उन्हें अपने विभागों में जमकर काम करना है। इसके लिए उनके विभागों में उनकी पसंद के अफसर लगाए जाएं।

भाजपा नेताओं और विधायकों की शिकायत दूर करते हुए इस बार मुख्यमंत्री राजे उनकी सिफारिशों को महत्त्व देंगी। दूसरी तरफ विपक्ष का आरोप है कि वसुंधरा सरकार पर नौकरशाही हावी है। इससे भाजपा विधायकों और नेताओं में नाराजगी फैली है। विधायकों की सरकार में पूछ नहीं होने का कारण नौकरशाहों का सरकार पर हावी होना ही है।

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