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राजस्थान : गहलोत सरकार का आदेश, सरकारी दस्तावेजों से हटाए जाएं दीनदयाल उपाध्याय के फोटो

राजस्थान सरकार ने बुधवार को आदेश दिया कि सभी सरकारी दस्तावेजों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के फोटो हटाए जाएं। इसकी जगह राष्ट्रीय चिह्न का इस्तेमाल किया जाएगा। यह आदेश सभी सरकारी विभागों, कॉर्पोरेशन, बोर्ड्स और स्व-सरकारी एजेंसियों को भेज दिया गया है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

राजस्थान सरकार ने बुधवार को आदेश दिया कि सभी सरकारी दस्तावेजों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के फोटो हटाए जाएं। इसकी जगह राष्ट्रीय चिह्न का इस्तेमाल किया जाएगा। यह आदेश सभी सरकारी विभागों, कॉर्पोरेशन, बोर्ड्स और स्व-सरकारी एजेंसियों को भेज दिया गया है। यह आदेश 29 दिसंबर 2018 से लागू हो गया है। बता दें कि गहलोत सरकार ने 4 दिन पहले हुई कैबिनेट बैठक में ही यह फैसला किया था, जिसे बुधवार को लागू कर दिया गया। इस दौरान प्रदेश सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन में 250 रुपए का इजाफा भी कर दिया।

11 दिसंबर 2017 को बीजेपी सरकार ने दिया था आदेश : बता दें कि राजस्थान की पिछली सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी पर 11 दिसंबर 2017 को आदेश जारी करके सरकारी दस्तावेजों पर दीनदयाल उपाध्याय का फोटो लगाना अनिवार्य किया था। राजस्थान के प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी विभाग ने बुधवार को यह आदेश पलट दिया। सरकार के मुद्रण लेखन एवं सामग्री विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रवि शंकर श्रीवास्तव ने यह आदेश सभी विभागों व कलेक्टरों को भेजने के निर्देश दिए हैं।

वृद्धावस्था पेंशन में किया गया इजाफा : प्रदेश में 75 वर्ष से कम उम्र वाले बुजुर्गों को अब 500 की जगह 750 रुपए पेंशन दी जाएगी। वहीं, 75 वर्ष या इससे अधिक उम्र वालों को 750 रुपए की जगह 1000 रुपए पेंशन प्रतिमाह मिलेगी। इससे करीब 45 लाख बुजुर्ग को फायदा मिलेगा। पेंशन बढ़ोतरी का आदेश एक जनवरी से लागू हो गया है। बता दें कि 29 दिसंबर को हुई कैबिनेट की पहली बैठक में सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने इस संबंध में बुधवार को आदेश जारी कर दिया।

 

इस नियम में भी जल्द बदलाव होने का अनुमान : सूत्रों के मुताबिक, जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्य और सरपंचों के चुनाव में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता को हटाने वाला विधेयक विधानसभा के पहले ही सत्र में लाया जा सकता है। पिछली भाजपा सरकार ने पंचायत चुनाव से ठीक पहले अध्यादेश के जरिए जिला परिषद या पंचायत समिति सदस्य के लिए 10वीं पास और सरपंच के लिए 8वीं पास की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की शर्त लागू की थी।

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