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गहलोत ने पलटा वसुंधरा सरकार का यह फैसला, अब किताबों में हुए बदलाव पर कांग्रेस की नजर

राजस्थान में सीएम गहलोत की अध्यक्षता में शनिवार को कैबिनेट की पहली बैठक हुई। इस दौरान बीजेपी सरकार के 4 बड़े फैसलों को बदला गया। पहला निर्णय निकाय चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता को खत्म करना रहा। वसुंधरा राजे ने निकाय चुनाव लड़ने के लिए 10वीं पास होने को अनिवार्य किया था।

Author December 30, 2018 10:54 AM
अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे, फोटो सोर्स- सोशल मीडिया

राजस्थान में सीएम गहलोत की अध्यक्षता में शनिवार को कैबिनेट की पहली बैठक हुई। इस दौरान बीजेपी सरकार के 4 बड़े फैसलों को बदला गया। पहला निर्णय निकाय चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता को खत्म करना रहा। वहीं, मेयर, नगर परिषद सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता से कराने का प्रस्ताव पास कर दिया गया। बीजेपी शासन में बंद हुए अंबेडकर विधि और हरिदेव जोशी पत्रकारिता यूनिवर्सिटी को दोबारा खोलने व सरकारी लेटरहेड से पंडित दीनदयाल उपाध्याय का चित्र हटाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा प्रदेश सरकार वसुंधरा के कार्यकाल में स्कूल बुक्स में हुए बदलावों की भी समीक्षा करेगी। साथ ही, कांग्रेस के घोषणा-पत्र में शामिल 7 मुद्दों को लागू करने पर सहमति जताई गई।

वसुंधरा ने किए थे ये 4 बड़े फैसले : बीजेपी की वसुंधरा राजे सरकार ने 2014 में पंचायती राज व 2015 में स्थानीय निकायों में शैक्षणिक योग्यता जरूरी की थी। जिला परिषद व पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने के लिए 10वीं पास होना जरूरी था। गैर अनुसूचित क्षेत्र में सरपंच के लिए 8वीं पास व अनुसूचित क्षेत्र में 5वीं पास होना जरूरी था। वहीं, 2008 में कांग्रेस सरकार ने मेयर, नगर परिषद सभापति व चेयरमैन का चयन विधायक व सांसद की तरह सीधे जनता से कराने का निर्णय किया था। 2013 में बीजेपी सरकार आई तो इसे बदल दिया गया। इसके अलावा गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान 2012 में अंबेडकर लॉ तथा हरिदेव जोशी पत्रकारिता यूनिवर्सिटी शुरू की थी। बीजेपी सरकार ने इन्हें 2016 और 2017 में बंद कर दिया। वहीं, 13 दिसंबर 2017 को सरकारी लेटरहेड पर अशोक चिह्न के साथ पं. दीनदयाल उपाध्याय का चित्र अनिवार्य कर दिया था।

पहली बैठक में कांग्रेस ने लिए ये फैसले : कांग्रेस ने पहली कैबिनेट बैठक में अपने चुनावी घोषणा-पत्र को नीतिगत दस्तावेज के रूप में रखा। इसमें की गई घोषणाओं में से सात को मंजूरी भी दी। इनमें किसानों की कर्जमाफी व संविदा कर्मियों की समस्याओं के उचित समाधान के लिए कमेटी बनाने जैसे फैसले शामिल हैं। वृद्धावस्था पेंशन में 250 रुपए प्रतिमाह का इजाफा करने और लोक सेवाओं को गारंटी अधिनियम प्रभावी करने का फैसला भी किया गया। कैबिनेट में तय किया गया कि सभी मंत्री रोजाना सुबह 9 से 10 बजे तक अपने आवास पर जनसुनवाई करेंगे। वहीं, पिछली सरकार के आखिरी छह महीनों में किए गए फैसलों की समीक्षा की जाएगी। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रमेश चंद मीना ने घोषणा की है कि खाद्य सुरक्षा योजना के तहत अब बीपीएल श्रेणी के परिवारों को एक रुपए किलो की दर से राशन का गेहूं मिलेगा। अभी इसकी दर 2 रुपए प्रति किलो है।

 

घोषणा-पत्र के ये 7 मुद्दे हुए पास

  • राजस्थान सरकार किसानों का 18000 करोड़ का ऋण माफ करने की घोषणा कर चुकी है। कैबिनेट में फैसला लिया गया कि इसके लिए अंतरविभागीय कमेटी बनेगी, जो सहकारी बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक व भूमि विकास बैंक की ऋण माफी के लिए पात्रता व मापदंड तैयार करेगी।
  • वृद्धावस्था पेंशन 500 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 750 रुपए प्रतिमाह और 750 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 1000 रुपए प्रतिमाह करने का निर्णय लिया गया।
  • राजस्थान सरकार के सभी मंत्री रोजाना सुबह 9 से 10 बजे तक अपने आवास पर जनसुनवाई करेंगे।
  • सरकार ने चतुर्थ श्रेणी सेवा की सीधी भर्तियों के लिए गठित चयन समिति या चयन बोर्ड में अल्पसंख्यक समुदाय से एक सदस्य शामिल करने के लिए भी कहा है। इसके साथ एससी, एसटी, ओबीसी व एक महिला भी सदस्य समिति में शामिल होगी।
  • संविदा कर्मचारियों, एनआरएचएम कर्मी, पैराटीचर्स, लोक जुंबिश कर्मियों, आंगनबाड़ी कर्मचारियों, विद्यार्थी मित्रों व पंचायत सहायकों के लिए कमेटी बनाई जाएगी।
  • अफसरों एवं विभागीय जवाबदेही के लिए लोकसेवा गारंटी एक्ट व 2011 व सुनवाई का अधिकार एक्ट 2012 को उपयोग में लाया जाएगा।

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