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राजस्थान: जीका और स्वाइन फ्लू को रोकने में नाकाम स्वास्थ्य विभाग

राज्य में 2015 से स्वाइन फ्लू की बीमारी भयावह तौर पर सामने आई। इसके बाद से इस बीमारी के मरीजों की संख्या और होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है पर सरकार उसे रोकने के लिए कोई भी इंतजाम नहीं कर पाई है।

Author November 7, 2018 3:06 AM
राज्य में 2015 से स्वाइन फ्लू की बीमारी भयावह तौर पर सामने आई।

राजीव जैन

राजस्थान में मौसमी बीमारियों का कहर सामने आ रहा है। इस बार जीका वायरस जयपुर में ऐसा फैला कि लोगों में खौफ पैदा हो गया। दूसरी ओर, स्वाइन फ्लू के देश में सबसे अधिक मामले राजस्थान से ही सामने आए। देश में इस साल करीब पौने चार सौ लोगों की स्वाइन फ्लू से मौत हो हुई, इनमें से अकेले राजस्थान में ही 190 मौतें हुर्इं। स्वाइन फ्लू के मामलों में महाराष्ट्र दूसरे और गुजरात तीसरे स्थान पर रहा। स्वाइन फ्लू की रोकथाम के मामले में प्रदेश का चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है।

राज्य में 2015 से स्वाइन फ्लू की बीमारी भयावह तौर पर सामने आई। इसके बाद से इस बीमारी के मरीजों की संख्या और होने वाली मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है पर सरकार उसे रोकने के लिए कोई भी इंतजाम नहीं कर पाई है। इस बार जीका का प्रकोप जयपुर में ऐसा हुआ कि सब तरफ ही हड़कंप मच गया। जयपुर में जीका वायरस से पीड़ितों की संख्या डेढ़ सौ को पार कर गई है। जीका के लगातार बढ़ते जा रहे मरीजों के बावजूद सरकार कुछ करने के बजाये अब इसे सामान्य बुखार बता रही है और दावा कर रही है कि यह खतरनाक नहीं है। जयपुर में सबसे पहले 11 सितंबर को जीका का पहला मरीज सामने आया और उसके बाद तो कई इलाकों से इसके मरीज सामने आने पर चिकित्सा महकमा सवालों के घेरे में आ गया। जीका को लेकर सरकार ने सिर्फ अलर्ट जारी कर अपने काम को पूरा कर लिया। इसका असर प्रदेश में आने वाले देसी विदेशी पर्यटकों की आवक पर पड़ा और पर्यटन कारोबार को बड़ा धक्का लगा।

जीका के साथ ही प्रदेश में स्वाइन फ्लू, डेंगू, मलेरिया, स्क्रब टायफस के बड़ी संख्या में मरीज सामने आ रहे हैं। स्क्रब टायफस के मरीजों के आंकड़ें सबसे ज्यादा लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। इस साल अब तक इस बीमारी के 1 हजार 650 पॉजीटिव मरीज सामने आए और इनमें से 33 की मौत हो गई। प्रदेश में सबसे पहली बार 2012 में स्क्रब टायफस के मरीज सामने आए। विभाग के मुताबिक 2012 में 223, 2013 में 513, 2014 में 537, 2015 में 370, 2016 में 115, 2017 में 954 और 2018 में अब तक 1650 मरीजों के सामने आने और उनमें से 33 की मौत होने से इसे अन्य मौसमी बीमारियों से ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है।

इसके अलावा स्वाइन फ्लू के वायरस के पीड़ितों का तो बुरा हाल है। प्रदेश में इस साल अब तक 1840 पॉजीटिव मामलों में से 185 मरीजों की मौत हो चुकी है। प्रदेश में 2014 में सबसे पहले स्वाइन फ्लू के 64 मामले सामने आए थे। इसके बाद 2015 में 6858, 2016 में 197, 2017 में 3619 मामले सामने आए थे। विशेषज्ञ और डॉक्टरों ने इसे चिंताजनक स्थिति माना है।

एसएमएस अस्पताल के डॉक्टर अजीत सिंह का कहना है कि जीका, डेंगू, स्क्रब टायफस और स्वाइन फ्लू जिस तेजी से फैला है, वह चिंता की बात है। इन बीमारियों की पहचान में समय भी लगता है। पिछले सालों की तुलना में इस साल इन रोगों के मामले ज्यादा आए हैं। जीका का मामला सामने आते ही विभाग सतर्क हो गया था। इसके लिए जागरूकता के कार्यक्रम चलाए गए और प्रभावित क्षेत्रों में कीटनाशकों का छिड़काव किया गया। सरकार ने अस्पतालों में मरीजों को भर्ती कर उनके उपचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। जीका को अब नियंत्रित कर लिया गया है। स्वाइन फ्लू और स्क्रब टायफस के लिए भी विभाग ने विशेषज्ञों की मदद लेकर पीड़ितों का उपचार किया है। – कालीचरण सर्राफ, चिकित्सा मंत्री, राजस्थान

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