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Rajasthan Election: 30 साल से BJP का मजबूत गढ़ है हाड़ौती, इन कारणों से हिल सकता है किला

किसानों के समर्थन में राहुल गांधी के नेतृत्व में यहां कई पदयात्राओं का आयोजन किया गया जिसके चलते लोगों के पास कांग्रेस विकल्प के रुप में उभर रही हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने बीजेपी प्रत्याशियों के सामने मजबूत प्रत्याशी खड़े कर जनता को अच्छे विकल्प भी दे दिए हैं।

December 3, 2018 4:07 PM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Express File Photo)

पूर्वी राजस्थान का हाड़ौती क्षेत्र बीजेपी का अभेद्य दुर्ग माना जाता है। बूंदी, कोटा, झालावाड़ और बारां आदि चार जिले इस क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पकड़ भी काफी मजबूत रही है। राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे खुद झालरापाटन सीट से विधानसभा चुनाव लड़ती आ रही हैं, वहीं उनके बेटे दुष्यंत झालावाड़ सीट से लोकसभा सांसद हैं। पिछले 30 सालों से बीजेपी का मजबूत गढ़ रहे इस क्षेत्र के लोगों का बीजेपी से अब मोहभंग होता नजर आ रहा है। आइए जानते हैं कि किन कारणों से यहां जनता नाराज है और बीजेपी का यह मजबूत किला खतरे में हैं।

राजस्थान के 24,185 वर्ग किलोमीटर में फैले हाड़ौती में बीजेपी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से हो जाता है कि साल 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने हाड़ौती क्षेत्र की 17 सीटों में 16 सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन विकास और रोजगार की कमी से जूझ रहे लोग इस बार वसुंधरा सरकार से बिफरे नजर आ रहे हैं। हाड़ौती क्षेत्र में लोग जाति के आधार पर कम और विकास के आधार पर अधिक वोट देते हैं। बेरोजगारी, फसलों का सही मूल्य ना मिलना, गरीबी, फसलों को होने वाला नुकसान यहां के मुख्य मुद्दे हैं जिन पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया है। किसान यहां खाद की कालाबाजारी, अफसरों की मनमर्जी और गांवों में स्कूल आदि ना होने  के कारण भी बीजेपी सरकार से काफी खफा है। किसानों का गुस्सा इस बात पर भी है कि यूरिया की कमी के कारण खाद की कालाबाजारी हो रही है जिस वजह से 265 रुपये में बिकने वाली यूरिया 320 से 380 रुपये में बिक रही है लेकिन इस तरफ ध्यान देने वाला कोई नहीं है।

>खेती में आ रही इन समस्याओं के चलते अब लोग रोजगार के अन्य साधन ढूंढने पर मजबूर हो रहे हैं। लेकिन आज भी शिक्षा के लिए गांवों में अच्छे स्कूलों और कॉलेजों का काफी अभाव है। ऐसे में लोग यह सोच रहे हैं कि वे आखिर जाएं तो जाएं कहां। वहीं इस स्थिति का फायदा उठाते हुए कांग्रेस ने यहां चुनाव प्रचार में काफी मेहनत की है। किसानों के समर्थन में राहुल गांधी के नेतृत्व में यहां कई पदयात्राओं का आयोजन किया गया जिसके चलते लोगों के पास कांग्रेस विकल्प के रुप में उभरती दिख रही है। इसके अलावा कांग्रेस ने बीजेपी प्रत्याशियों के सामने मजबूत प्रत्याशी खड़े कर जनता को अच्छे विकल्प भी दे दिए हैं। झालरापाटन विधानसभा में वसुंधरा राजे के सामने बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में शुमार रहे जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह को कांग्रेस ने मैदान में उतारकर लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है। वसुंधरा से राजपूतों की नाराजगी का फायदा उठाकर मानवेंद्र राजपूती वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। वहीं बारां जिले की अंता सीट से कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी चुनाव लड़ रहे हैं जिन्हें कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद कुमार भाया से कड़ी टक्कर मिल रही है। विकास की कमी के कारण बीजेपी की जड़ें अब हाड़ौती में कमजोर पड़ती जा रही है।

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