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राहुल, प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद आखिरकार मान ही गए सचिन पायलट, रखी ये शर्तें

पायलट ने कहा कि उनकी पद की लालसा नहीं है और उनके मुद्दे सैद्धांतिक हैं जो उन्होंने पार्टी आलाकमान के समक्ष रख दिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि समस्या का जल्द समाधान हो जाएगा।

Author नई दिल्ली | August 11, 2020 7:53 AM
priyanka gandhi rahul gandhiपायलट की कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात विधानसभा सत्र आरंभ होने से कुछ दिनों पहले हुई है।

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत करने वाले वाले पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की सोमवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात और मामले के ‘उचित समाधान’ के लिए तीन सदस्यीय समिति के गठन का फैसला होने के बाद प्रदेश में सियासी संकट का पटाक्षेप होता नजर आ रहा है। पिछले कई हफ्तों से चल रही सियासी उठापठक के बीच पायलट ने राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा से करीब दो घंटे तक मुलाकात की तथा उनके समक्ष अपना पक्ष विस्तार से रखा।

इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तीन सदस्यीय समिति गठित करने का फैसला किया ताकि पायलट एवं उनके समर्थक विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों का निदान हो सके और मामले का उचित समाधान किया जा सके। कांग्रेस की ओर से तीन सदस्यीय समिति के गठन के फैसले की घोषणा होने के बाद पायलट और उनके समर्थक विधायक पार्टी का वाररूम कहे जाने वाले ‘15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड’ पहुंचे जहां उन्होने प्रियंका गांधी, वरिष्ठ नेता अहमद पटेल और केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक की।

इस मुलाकात के बाद पायलट ने कहा कि उनकी पद की लालसा नहीं है और उनके मुद्दे सैद्धांतिक हैं जो उन्होंने पार्टी आलाकमान के समक्ष रख दिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि समस्या का जल्द समाधान हो जाएगा। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बयान में कहा कि पायलट ने कांग्रेस पार्टी और राजस्थान में कांग्रेस सरकार के हित में काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

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वेणुगोपाल ने कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने फैसला किया है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी पायलट एवं अन्य नाराज विधायकों की ओर से उठाए गए मुद्दों के निदान एवं उचित समाधान तक पहुंचने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन करेगी।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक दूसरे का परस्पर सम्मान करते हुए एकजुट होकर आगे बढ़ेगी। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राहुल गांधी के दखल से राजस्थान में राजनीतिक संकट का सौहार्दपूर्ण हल निकाल लिया गया।

उन्होंने कहा, ‘यह कांग्रेस में एकजुटता और कांग्रेस विधायकों की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वे भाजपा के जाल में नहीं फंसे।’ कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने रहेंगे और पायलट को क्या भूमिका दी जानी चाहिए, इस पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं हुआ है। इससे पहले, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ मुलाकात में पायलट की करीब दो घंटे तक चर्चा हुई।

कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के बाद पायलट ने संवाददाताओं से कहा, ‘सरकार और संगठन के कई ऐसे मुद्दे थे जिनको हम रेखांकित करना चाहते थे। चाहे देशद्रोह का मामला हो, एसओजी जांच का विषय हो या फिर कामकाज को लेकर आपत्तियां हों, उन सभी के बारे में हमने आलाकमान को बताया।’ उन्होंने कहा, ‘हमने शुरू से यह बात कही कि जो हमारे मुद्दे हैं वे सैद्धांतिक हैं। मुझे लगता था कि ये पार्टी के हित में हैं और इनको उठाना बहुत जरूरी है। हमने ये सारी बातें आलाकमान के समक्ष रखी हैं।’

पायलट ने कहा, ‘हमारी जवाबदेही बनती है कि हम कैसे वादों को पूरा करें। पार्टी ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करना जरूरी है। मुझे लगता है कि जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा।’ इस बीच, पायलट के समर्थक माने जाने वाले विधायक भंवर लाल शर्मा ने सोमवार शाम जयपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की।

पायलट की कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात विधानसभा सत्र आरंभ होने से कुछ दिनों पहले हुई है।14 अगस्त से राजस्थान विधानसभा का सत्र आरंभ होगा। मुख्यमंत्री गहलोत के खिलाफ खुलकर बगावत करने और विधायक दल की बैठकों में शामिल नहीं होने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने पायलट को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री के पदों से हटा दिया था। बागी रुख अपनाने के साथ ही पायलट कई बार स्पष्ट कर चुके थे कि वह भाजपा में शामिल नहीं होंगे।

पायलट और उनके साथी 18 अन्य विधायकों की बगावत के कारण गहलोत सरकार मुश्किल में आ गई थी। गहलोत और कांग्रेस अपनी सरकार बचाने के लिए पिछले कई हफ्तों से जुटे हुए थे। पहले विधायकों को जयपुर के होटल में रखा गया था। बाद में उन्हें जैसलमेर के एक होटल में भेज दिया गया।

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