पंजाब के बाद अब राजस्थान कांग्रेस में घमासान: CM गहलोत के OSD ने दिया इस्तीफा, कैप्टन के इस्तीफे पर इशारों ही इशारों में कसा था तंज

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के OSD लोकेश शर्मा ने शनिवार देर रात अपना इस्तीफा सीएम दफ्तर को भेज दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने अपने ट्वीट को राजनैतिक रंग देने पर नाराजगी जताई है।

Ashok Gehlot
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल/ Indian Express)

अभी पंजाब कांग्रेस में जारी सियासी घमासान खत्म भी नहीं हो पाया था कि राजस्थान कांग्रेस के अंदर पनप रही नाराजगी भी बाहर आती दिखाई दे रही है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के OSD लोकेश शर्मा ने शनिवार देर रात अपना इस्तीफा सीएम दफ्तर को भेज दिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने अपने ट्वीट को राजनैतिक रंग देने पर नाराजगी जताई है। दरअसल पंजाब में कैप्टन अमरिंदर के इस्तीफे के प्रकरण के बीच उन्होंने ट्वीट किया, जिसमें लोकेश शर्मा ने लिखा “मजबूत को मजबूर और मामूली को मगरूर किया जाए, बाड़ ही खेत को खाए तो उसे कौन बचाए।” उनके इस ट्वीट को पंजाब से जोड़कर देखा जाने लगा।

लोकेश शर्मा ने अपने इस्तीफे में कहा है कि मैं 2010 से ट्विटर पर सक्रिय हूं और आज तक पार्टी लाइन से हटकर कोई शब्द नहीं लिखा। उन्होंने सीएम गहलोत को लिखा कि अगर मेरे शब्दों से आपको दुख पहुंचा हो तो मैं माफी मांगता हूं और अगर आपको लगता है कि मैंने जानबूझ कर गलती की है तो मैं अपने पद से इस्तीफा देता हूं।

राजस्थान कांग्रेस में दबी आंतरिक कलह किसी से छिपी नहीं है। गहलोत बनाम सचिन पायलट के बीच तल्खी कम होने का नाम नहीं ले रही है। कई बार सार्वजनिक तौर पर दोनों ही खेमों की तरफ से खुलकर बयानबाजी की जा चुकी है। ऐसे में पंजाब के प्रकरण के बीच सीएम गहलोत के OSD का ट्वीट और फिर उस पर आपत्ति के बाद इस्तीफे की पेशकश, किसी बड़ी सियासी हलचल के संकेत दे रही है।

इधर पंजाब के कैप्टन अमरिंदर की नाराजगी पर अशोक गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर नसीहत दी है कि उम्मीद है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ऐसा कोई कदम नहीं उठायेंगे जिससे कांग्रेस पार्टी को नुकसान हो। उन्होंने लिखा कि कैप्टन साहब ने स्वयं कहा कि पार्टी ने उन्हें साढे़ नौ साल तक मुख्यमंत्री बनाकर रखा है। उन्होंने अपनी सर्वोच्च क्षमता के अनुरूप कार्य कर पंजाब की जनता की सेवा की है। हाईकमान को कई बार विधायकों और आमजन से मिले फीडबैक के आधार पर पार्टी हित में फैसले करने पड़ते हैं। उन्होंने आगे लिखा कि मेरा व्यक्तिगत भी मानना है कि कांग्रेस अध्यक्ष कई नेता, जो मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में होते हैं, उनकी नाराजगी मोल लेकर ही मुख्यमंत्री का चयन करते हैं।

अशोक गहलोत के अनुसार लेकिव वही मुख्यमंत्री को बदलते वक्त हाईकमान के फैसले को नाराज होकर गलत ठहराने लग जाते हैं। ऐसे क्षणों में अपनी अर्न्तरात्मा को सुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि देश फासिस्टी ताकतों के कारण किस दिशा में जा रहा है, यह हम सभी देशवासियों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। इसलिए ऐसे समय हम सभी कांग्रेसजनों की जिम्मेदारी देश हित में बढ़ जाती है। हमें अपने से ऊपर उठकर पार्टी व देश हित में सोचना होगा।

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