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Rajasthan Politics: राजस्थान में रातभर चला ‘सियासी ड्रामा’, गहलोत गुट ने दिखाया दम, सामने रखीं ये शर्तें

Rajasthan Politics: गहलोत समर्थक विधायकों की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को पार्टी विधायकों के विधानसभा अध्यक्ष के घर जाने के फैसले को बगावत के रूप में नहीं देखना चाहिए।

Rajasthan Politics: राजस्थान में रातभर चला ‘सियासी ड्रामा’, गहलोत गुट ने दिखाया दम, सामने रखीं ये शर्तें
राजस्थान कांग्रेस में सियासी घमासान (Photo Source- PTI)

Rajasthan Congress: राजस्थान कांग्रेस में सियासी घमासान मचा हुआ है। गहलोत समर्थक विधायकों ने सचिन पायलट के नेतृत्व में काम करने से साफ इनकार कर दिया है। दरअसल, पार्टी आलाकमान ने तय किया था कि मौजूदा सीएम अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की स्थिति में उनकी जगह सचिन पायलट को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया जाए।

पार्टी के इस फैसले से नाराज कांग्रेस के 92 विधायकों ने सामूहिक रूप से विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालात यह है कि असंतुष्ट विधायक हाईकमान से भेजे गए केंद्रीय पर्यवेक्षकों मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन से मिलने तक को तैयार नहीं है। दोनों नेताओं ने विधायकों से अपनी बात एक-एक कर रखने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उसके बाद भी वे राजी नहीं हुए। विधायक इस बात पर अड़े हैं कि वे सचिन पायलट को मुख्यमंत्री के रूप में नहीं स्वीकार करेंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष को दी जाए मुख्यमंत्री नियुक्त करने की जिम्मेदारी: एआईसीसी पर्यवेक्षक अजय माकन ने बताया, “कांग्रेस विधायक प्रताप खाचरियावास, एस धारीवाल और सीपी जोशी ने हमसे मुलाकात की और 3 मांगें रखीं। जिनमें से एक यह है कि 19 अक्टूबर के बाद कांग्रेस अध्यक्ष को मुख्यमंत्री नियुक्त करने की जिम्मेदारी सौंपने के प्रस्ताव को लागू करने की घोषणा करना। हमने कहा कि यह हितों का टकराव होगा।” उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से, यह अनुशासनहीनता है। जबकि एक बैठक बुलाई गई और साथ ही दूसरी बैठक बुलाई गई।

अजय माकन ने कहा कि उनकी दूसरी शर्त थी कि वो समूहों में आना चाहते थे जब हमने कहा कि हम सभी से अलग-अलग बात करेंगे, लेकिन उन्होंने स्वीकार नहीं किया । कांग्रेस सूत्रों ने पुष्टि की कि मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन दिल्ली लौट रहे हैं। रविवार देर रात 82 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के आवास पर पहुंचकर अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया था। हालांकि, प्रताप सिंह का कहना है कि इस्तीफे पर हस्ताक्षर करने वाले 92 विधायक हैं।

नया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के वफादारों में से: गहलोत गुट ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कहा गया कि नया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के वफादारों में से होना चाहिए। वो लोग जो उनके साथ खड़े थे जब 2020 में सचिन पायलट के नेतृत्व में हुए विद्रोह में सरकार को गिराने की धमकी दी गयी थी। गहलोत गुट ने यह भी मांग की कि पार्टी अध्यक्ष का चुनाव खत्म होने तक अगला मुख्यमंत्री चुनने के लिए विधायक दल की कोई बैठक नहीं होनी चाहिए।

एमएलए प्रताप खाचरियावास का कहना है कि सभी विधायक काफी गुस्से में हैं। उन्होंने कहा, “विधायक इस बात से नाराज हैं कि अशोक गहलोत हमसे बातचीत किए बिना कोई फैसला कैसे ले सकते हैं। सिर्फ 10-15 विधायकों की ही बात सुनी जा रही है, जबकि बाकी को नजरअंदाज किया जा रहा है। पार्टी हमारी नहीं सुनती है और हमसे सलाह लिए बिना ही फैसले लिए जाते हैं।”

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First published on: 26-09-2022 at 11:55:45 am
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