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राजस्थानः सदन में स्पीकर से भिड़ गए कांग्रेस विधायक, अपनी ही सरकार के खिलाफ उठाई आवाज़

स्पीकर सीपी जोशी ने कहा आप अध्यक्ष को डिक्टेट नहीं कर सकते। अगर मुझ पर विश्वास नहीं है तो नया अध्यक्ष चुन लीजिए, मुझे खुशी होगी।

राजस्थान के बीकानेर में सीएम का स्वागत करते पार्टी कार्यकर्ता। (फोटो- पीटीआई)

कांग्रेस का लगता है समय ही खराब चल रहा है। पिछले साल राजस्थान के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलौत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच मतभेद सामने आने पर बखेड़ा खड़ा हो गया था। इसके बाद सचिन पायलट को मंत्रीमंडल से हटा दिया गया था। साथ ही उनके कुछ समर्थक विधायकों को भी हटाया गया था। हालांकि बाद में दोनों पक्षों में सुलह हो जाने पर सरकार पर कोई खतरा नहीं आया, लेकिन पार्टी के अंदर बगावत और विद्रोह की चिंगारी कभी-कभी फिर से दिखाई देने लगती है। बुधवार को विधानसभा में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के एक विधायक रमेश मीणा प्रश्नकाल के दौरान प्रश्न पूछने के लिए खड़े हुए तो उनका माइक खराब था। लिहाजा वह दूसरी सीट पर जाकर बोलने लगे।

इस पर अध्यक्ष सीपी जोशी ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। उन्होंने कहा कि आप अध्यक्ष को डिक्टेट नहीं कर सकते। अगर मुझ पर विश्वास नहीं है तो नया अध्यक्ष चुन लीजिए, मुझे खुशी होगी। अपनी ही सरकार, अपनी ही पार्टी और अपने ही अध्यक्ष के इस व्यवहार से विधायक रमेश मीणा परेशान हैं। वे बार-बार अध्यक्ष को यह बताते रहे कि उनका माइक खराब है। उन्हें वह सीट दी गई है, जिस पर माइक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में वह अपनी बात कैसे रखें। लेकिन अध्यक्ष ने कुछ भी सुनने से मना कर दिया और उनको कड़ी फटकार लगाते हुए अपनी सीट पर जाकर बोलने को कहा। आरोप है कि रमेश मीणा सचिन पायलट के समर्थक हैं और दलित समुदाय के हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में सचिन पायलट के समर्थक विधायकों के साथ भेदभाव किया जाता है। सदन से निकलने के बाद उन्होंने बाहर संवाददाताओं से कहा कि प्रदेश सत्ता व संगठन नेतृत्व अनुसूचति जाति (एससी ) अनुसूचतित जनजाति (एसटी) और अल्पसंख्यक विधायकों के साथ भेदभाव करता है। कहा कि “सदन में बैठने की व्यवस्था में हमारे साथ भेदभाव हो रहा है। सदन के भीतर एससी, एसटी और अल्पसंख्यक विधायकों को जान-बूझकर बिना माइक वाली सीटों पर पीछे बिठाया जा रहा है। विधायकों के बैठने की व्यवस्था की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार हमारी आवाज को दबा रही है।”

उन्होंने बताया, “एससी, एसटी और अल्पसंख्यक वर्गों के सदन में 50 विधायक हैं। कारोना महामारी के नाम पर सदन में इस तरह बैठने की व्यवस्था की गई है कि दलित वर्ग के मंत्री टीकाराम जुली और भजन लाल जाटव को बिना माइक वाली सीट पर बिठाया गया है। मेरे अलावा एसटी के महेंद्र जीत मालवीय और अल्पसंख्यक वर्ग के अमिन खान व दानिश अबरार को भी बिना माइक वाली सीटें आवंटित की गई है। जुली और जाटव तो मंत्री हैं, लेकिन उन्हें प्रश्नों के जवाब देने होते हैं, लेकिन उनके साथ भी दलित होने के कारण भेदभाव किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “संसदीय कार्यमंत्री और मुख्य सचेतक को अवगत कराने के बावजूद कोई सुधार नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी और अल्पसंख्यक समाज कांग्रेस की रीढ़ की हड्डी है, उसके साथ भेदभाव किया जा रहा है। इन वर्गों के प्रतिनिधियों के साथ भेदभाव कर के सरकार क्या संदेश देना चाहती है। हमें तो यहां बोलने का अधिकार ही नहीं है।”

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