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अब महाराणा प्रताप पर सिलेबस में बदलाव करेगी कांग्रेस सरकार, हल्दी घाटी की जंग का विजेता होने की बात हटेगी

दोतासरा ने बताया कि नए पाठ्यक्रम में ये बताने की कोशिश की गई है कि हल्दीघाटी का युद्ध हिंदू-मुस्लिम के बीच की जंग नहीं थी। पाठ्यक्रम में बताया गया है कि दोनों सेनाओं के सेनापति मुस्लिम थे।

नए सिलेबस में महाराणा प्रताप के साथ ही अकबर को भी हल्दीघाटी युद्ध का विजेता नहीं बताया गया है।

राजस्थान की कांग्रेस सरकार स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव करने जा रही है। दरअसल पिछली भाजपा सरकार ने पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी के युद्ध का विजेता बताया था। अब कांग्रेस सरकार अब इसमें संशोधन करने जा रही है। नए पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी का विजेता नहीं बताया गया है। हालांकि खास बात ये है कि हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर को भी विजेता घोषित नहीं किया गया है। पाठ्यक्रम में यह बदलाव 12वीं कक्षा के सिलेबस में किया गया है। राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह दोतासरा से जब इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में कौन विजेता रहा, ये पढ़ना जरुरी नहीं है। नए पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप के संघर्ष के बारे में बताया गया है, जिससे छात्र प्रेरणा ले सकें।

दोतासरा ने बताया कि नए पाठ्यक्रम में ये भी बताने की कोशिश की गई है कि हल्दीघाटी का युद्ध हिंदू-मुस्लिम के बीच की जंग नहीं थी। पाठ्यक्रम में बताया गया है कि दोनों सेनाओं के सेनापति मुस्लिम थे। राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री ने कहा कि उनकी सरकार महाराणा प्रताप पर भाजपा की ओर से की जा रही सियासत से दूर रहना चाहती है। महाराणा प्रताप की तरह ही राजस्थान सरकार पाठ्यक्रम में वीर सावरकर से जुड़ी जानकारी में भी कुछ बदलाव करने जा रही है।

बीती सरकार ने पाठ्यक्रम में वीर सावरकर को आजादी की लड़ाई का हीरो और हिंदुत्ववादी बताया था। अब कांग्रेस सरकार ने इसे बदलने का फैसला किया है। राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविंद दोतासरा ने सोमवार को आरोप लगाते हुए बताया कि पूर्व की भाजपा सरकार ने वीर सावरकर और दीनदयाल उपाध्याय को महिमामंडित करके बताया, जबकि उन्हें संघ विचारधारा के समर्थकों के तौर पर जाना जाता है। पिछली भाजपा सरकार ने 3 साल पहले सिलेबस में वीर सावरकर से संबंधित पाठ्यक्रम को शामिल किया था। इसमें सावरकर को स्वतंत्रता सेनानी, देशभक्त और महान क्रांतिकारी बताया था। अब कांग्रेस सरकार ने दावा किया है कि पक्के सबूतों और तथ्यों के आधार पर पता चला है कि सावरकर ने अंडमान निकोबार की सेल्यूलर जेल से रिहाई के लिए 3 बार तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के सामने दया याचिका भेजी थी।

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