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गहलोत सरकार ने सरकारी योजना से हटाया दीनदयाल उपाध्याय का नाम, BJP विधायक बोले- काम पर दें ध्यान

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ योजना के आगे से पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटाकर मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक तीर्थ योजना कर दिया गया है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत।

राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही सरकारी योजनाओं के नाम बदले जा रहे है। इस क्रम में जनसंघ के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर चल रही दीनदयाल उपाध्याय वरिष्ठ नागरिक तीर्थ योजना के आगे से पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम हटा दिया गया है। बता दें कि इस योजना का नाम एक बार फिर से मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक तीर्थ योजना कर दिया गया है। जिसके बाद भाजपा ने अशोक गहलोत सरकार के इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नाम बदलने के स्थान पर सरकार को कुछ काम करके दिखाना चाहिए।

बता दें कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में राज्य के 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कराने की योजना शुरू की थी। तब इस योजना का नाम ‘मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक तीर्थ योजना’ था, लेकिन 2013 में वसुंधरा राजे सरकार ने इस योजना के नाम के आगे पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम लगा दिया था। जिस पर उस समय कांग्रेस ने आपत्ति जताई थी। मामले पर पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि गहलोत सरकार को नाम नाम हटाने या जोड़ने की जगह पर विकास कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।

नाम बदलने के बाद कांग्रेस ने तर्क दिया है कि मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में इस योजना की शुरुआत की थी। उस समय इस योजना का नाम ‘मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक तीर्थ योजना’ था। जिसे वसुंधरा राजे ने सत्ता में आने के बाद इस योजना के नाम के आगे पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम जोड़ दिया था। इसलिए ये योजना कांग्रेस की थी, जिसे उसके पुराने मूल नाम से शुरू किया जा रहा है।

गहलोत सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री भंवरलाल मेघवाल और उच्च शिक्षामंत्री भंवर सिंह भाटी ने कहा कि पूर्व की कांग्रेस सरकार ने अपने किसी भी नेता के नाम से यह यात्रा शुरू नहीं की थी। लेकिन वसुंधरा राजे ने आरएसएस को खुश करने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम इसके साथ जोड़ा दिया था जोकि गलत था। इसलिए अब गलती को सुधारा गया है। गौरतलब है कि इससे पहले गहलोत सरकार ने जमीनों के पट्टों के ऊपर से जनसंघ के संस्थापक दीनदयाल उपाध्याय का लोगो हटाया गया था। इसके अलावा उन्होंने निर्णय लिया था कि किसी भी सरकारी लेटर पैड पर दीनदयाल उपाध्याय का लोगो नहीं छापा जाएगा।

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