राजस्थान के वैर विधानसभा से बीजेपी विधायक बहादुर सिंह कोली ने एक अटपटा बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है। कोली ने भाजपा और कांग्रेस के बजट की तुलना क्रमशः लड़के और लड़की के जन्म से कर दी है। उनका कहना है कि इसी कारण कांग्रेस अब विपक्ष में बैठी है।
वैर विधानसभा से भाजपा विधायक बहादुर सिंह कोली ने भाजपा और कांग्रेस के बजट की तुलना क्रमशः लड़के और लड़की के जन्म से करते हुए विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी कारण कांग्रेस अब विपक्ष में बैठी है।
बजट की तुलना बेटा-बेटी से
विधानसभा में राजस्थान बजट पर चर्चा के दौरान भरतपुर जिले की वैर विधानसभा की अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षित सीट से विधायक सिंह ने कहा, ”हमारा बजट युवा है, उनका बजट बूढ़ा है…हमारे माननीय सीएम भजनलाल शर्मा, हमारी सरकार ने पहले बजट में एक लड़के को जन्म दिया था और फिर दूसरे व तीसरे बजट में भी यही हुआ। जो अपनी युवावस्था में बेटे को जन्म देता है, वह हमेशा काम आता है। ”
कोली ने कहा, ”और जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने अपने आखिरी बजट में कई घोषणाएं कीं। लेकिन बेटा नहीं, बेटी पैदा हुई और इसी वजह से आप आज विपक्ष में बैठे हैं।”
कोली की इस बात पर सदन में बैठे कई अन्य बीजेपी विधायक खिलखिलाते नज़र आए।
आपको बता दें कि बहादुर सिंह कोली एक बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। तीसरी बार विधायक बने कोली ने 1977 में लक्ष्मी देवी से विवाह किया था और उनके दो बेटे व दो बेटियां हैं।
विपक्ष ने की माफी की मांग
विपक्ष ने बीजेपी विधायक से सार्वजनिक तौर पर माफी की मांग की। नेता प्रतिपक्ष टीका राम जुली ने कहा, ”भाजपा विधायक द्वारा की गई यह बेटियों के खिलाफ टिप्पणी भाजपा की महिला-विरोधी और पितृसत्तात्मक सोच का स्पष्ट सबूत है। उनका यह कहना कि भजनलाल शर्मा सरकार का बजट ‘लड़का पैदा हुआ’ है और अशोक गहलोत सरकार का बजट ‘लड़की पैदा हुई’ है, यह बेहद संकीर्ण और रूढ़िवादी मानसिकता को दिखाता है।”
उन्होंने आगे कहा, ”शायद उन्हें याद नहीं कि जब एक लड़की जन्म लेती है तो वह रानी लक्ष्मीबाई बनकर अंग्रेजों को कड़ी टक्कर देती है। और जब वह इंदिरा गांधी बनती है तो देश के दुश्मनों को परास्त करती है। और जब वह सोनिया गांधी बनती है तो वंचितों को सशक्त बनाती है। राजस्थान में कालिबाई, अमृता देवी, शहीद हाड़ी रानी और मीराबाई जैसी वीरांगनाओं को सम्मान दिया जाता है, फिर भाजपा की सोच बेटियों के प्रति ऐसी क्यों है?”
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ”जिस बजट की कोली तारीफ कर रहे थे, वह भी सदन में एक महिला द्वारा पेश किया गया था और जिस सदन में खड़े होकर उन्होंने यह आपत्तिजनक बयान दिया, उसकी स्पीकर भी कभी एक महिला रह चुकी हैं।”
उन्होंने कहा कि ऐसी सोच ”न केवल महिलाओं का अपमान है बल्कि समाज में लैंगिक समानता की कोशिशों को भी कमजोर करती है। अगर जनप्रतिनिधि ही इस तरह की भेदभावपूर्ण भाषा का इस्तेमाल करेंगे तो समाज से लैंगिक भेदभाव कैसे खत्म होगा?”
