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राजस्थान सियासी संकटः BTP के 2 विधायकों से अशोक गहलोत सरकार को खुला समर्थन, वसुंधरा राजे बोलीं- कांग्रेस की अंतर्कलह का नुकसान झेल रही जनता

बीटीपी के विधायकों--राजकुमार रोत एवं रामप्रसाद ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की। इन विधायकों ने कहा कि उनके पार्टी अध्यक्ष एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार को सशर्त समर्थन देने पर सहमति जताई है।

Ashok Gehlot, BTP, Rajasthan,राजस्थान में भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के दोनों विधायकों ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार को समर्थन देने की सार्वजनिक तौर पर घोषणा की है।(फोटो-ANI)

राजस्थान में भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के दोनों विधायकों ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार को समर्थन देने की सार्वजनिक तौर पर घोषणा की। इन विधायकों ने कहा कि वे अपने पार्टी आलाकमान की अनुमति से अशोक गहलोत सरकार के समर्थन में हैं। राज्य के मौजूदा राजनीतिक संकट के बीच इन विधायकों ने पहली बार खुलकर यह बात कही है।

बीटीपी के विधायकों–राजकुमार रोत एवं रामप्रसाद ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की। इन विधायकों ने कहा कि उनके पार्टी अध्यक्ष एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं ने राज्य की अशोक गहलोत सरकार को सशर्त समर्थन देने पर सहमति जताई है। विधायकों के अनुसार शर्त यही है कि उनके विधानसभा क्षेत्रों में विकास संबंधी उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा।

बीटीपी के विधायक एवं प्रदेश पदाधिकारी बाद में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी मिले। गहलोत ने ट्वीट किया,‘‘बीटीपी के दोनों विधायकों ने उनकी प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ मुलाक़ात कर और अपने मांगपत्र के साथ चर्चा कर सरकार को समर्थन देने की घोषणा की।’’ डोटासरा ने कहा, ‘‘बीटीपी विधायक एवं उनके पार्टी नेताओं की मुख्यमंत्री से चर्चा हुई। वे पहले से ही हमारे साथ हैं और गहलोत सरकार को समर्थन का पुन: भरोसा दिया है।’’

बता दें कि मंगलवार को रोत का एक वीडियो गत यहां वायरल हुआ जिसमें वह आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में नहीं जाने दे रही। इससे पहले पार्टी ने एक व्हिप जारी कर अपने विधायकों से कहा था कि वे राज्य के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम में ‘तटस्थ’ रहें और विधानसभा में शक्ति परीक्षण की नौबत आती है तो वे न तो भाजपा और न ही कांग्रेस का समर्थन करें। इस बारे में रोत ने कहा कि पुलिस की गलतफहमी के कारण उक्त घटना हुई।उन्होंने कहा,’ मुझे नहीं पता उनके दिमाग में क्या था लेकिन उन्होंने कहा कि यह गलतफहमी से हुआ। अब सब ठीक है।’

कांग्रेस की अंतर्कलह का नुकसान राजस्थान की जनता को- राजेः राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस की अंतर्कलह का नुकसान राज्य की आम जनता को हो रहा है। इसके साथ ही राजे ने कहा कि वह पार्टी की निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में वे पार्टी एवं उसकी विचारधारा के साथ खड़ी हैं। राज्य में जारी मौजूदा राजनीतिक रस्साकशी एवं कांग्रेस के भाजपा नेताओं पर आरोप के बीच वसुंधरा राजे ने पहली बार कोई बयान दिया है। राजे ने पहले ट्वीट कर कहा,‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस की आतंरिक कलह का नुकसान आज राजस्थान की जनता को उठाना पड़ रहा है।’’

उन्होंने कहा,‘‘ऐसे समय में जब राज्य में कोरोना से 500 से अधिक मौत हो चुकी है और करीब 26000 लोग संक्रमित मिल चुके हैं … जब टिड्डियां हमारे किसानों के खेतों पर लगातार हमले कर रही हैं … ऐसे समय में जब महिलाओं के खिलाफ अपराध ने सीमाएं लांघ दी हैं ऐसे समय में कांग्रेस भाजपा एवं भाजपा नेतृत्व पर दोष लगाने का प्रयास कर रही है।’’ राजे ने कहा, ‘‘सरकार के लिए सिर्फ और सिर्फ जनता का हित सर्वोपरि होना चाहिए।’ उन्होंने यह भी लिखा ,‘‘ कभी तो जनता के बारे में सोचिए।’’

मायावती ने राजस्थान में राष्ट्रपति शासन की मांग की, कांग्रेस बोली- मजबूर हैं बसपा प्रमुखः बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने राजस्थान में चल रही सियासी उठा-पठक के बीच शनिवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तीखा हमला बोला और कहा कि राज्यपाल कलराज मिश्र को राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करनी चाहिए। इस पर पलटवार करते कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि मायावती ‘मजबूर’ हैं और अपनी ‘मजबूरियों’ के चलते वह बार-बार कांग्रेस विरोधी टिप्पणियां करती हैं।

मायावती ने कुछ महीने पहले अपनी पार्टी के विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने का उल्लेख करते हुए गहलोत पर जम कर निशाना साधा और दावा किया राजस्थान के मुख्यमंत्री ने पहले बसपा के विधायकों को ‘दगाबाजी करके’ कांग्रेस में शामिल कराया और अब फोन टैपिंग करा कर असंवैधानिक काम किया है। बता दें कि पिछले साल राजस्थान में बसपा के सभी छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उस समय भी मायावती ने कांग्रेस और गहलोत पर निशाना साधा था।

(भाषा इनपुट्स के साथ)

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