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मध्य प्रदेश के रास्ते पर राजस्थान? सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट में कलह गहराया, केंद्रीय नेतृत्व को सता रहा सत्ता जाने का डर

वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच अहं का टकराव हो रहा है और दोनों नेताओं में एक दूसरे के प्रति गहरा अविश्वास है।

Author Translated By नितिन गौतम जयपुर | Updated: July 12, 2020 8:49 AM
rajasthan sachin pilot ashok gehlotराजस्थान में सचिन पायलट और सीएम अशोक गहलोत के बीच मतभेद गहरा गए हैं। (फाइल)

जयपुर में तेजी से बदलते घटनाक्रम ने कांग्रेस हाईकमान को चिंतित कर दिया है। दरअसल राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच मतभेद गहरा रहे हैं। हालांकि एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने राजस्थान सरकार को कोई खतरा होने की बात नकार दी है लेकिन हालात देखते हुए कई नेता मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने और कमलनाथ सरकार के गिरने के घटनाक्रम को याद कर रहे हैं।

वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच अहं का टकराव हो रहा है और दोनों नेताओं में एक दूसरे के प्रति गहरा अविश्वास है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री और एआईसीसी के महासचिव रहे एक नेता का तो ये भी कहना है कि ‘इन हालात में किसी भी चीज की कोई गारंटी नहीं है।’

पार्टी नेताओं ने इशारा किया कि मौजूदा कलह कांग्रेस की बड़ी समस्या का हिस्सा है, जिसमें पार्टी के युवा नेताओं में अपने भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है और पार्टी अभी भी नेतृत्व के सवाल को सुलझाने का प्रयास कर रही है।

दरअसल सचिन पायलट और अशोक गहलोत में तनातनी की शुरुआत तभी हो गई थी, जब कांग्रेस पार्टी दिसंबर 2018 में राजस्थान में सत्ता में आयी थी। पार्टी द्वारा विधानसभा चुनाव के लिए नेता के चुनाव से इसकी शुरुआत हुई थी और जब कांग्रेस ने जीत के बाद तीसरी बार अशोक गहलोत को सीएम बनाया तो यह दरार और ज्यादा बढ़ गई थी।

इसकी वजह ये थी कि साल 2013 के विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद राज्य में पार्टी को फिर से मजबूत करने में सचिन पायलट ने प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए अहम भूमिका निभायी थी। इसके बाद मंत्री पद आवंटन को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच उभरी नाराजगी साफ देखी गई थी।

अशोक गहलोत द्वारा लोकसभा चुनाव में अपने बेटे वैभव को जोधपुर से पार्टी उम्मीदवार बनाना भी दोनों नेताओं के बीच की तनातनी का अगला चैप्टर था। लोकसभा चुनाव के बाद पायलट खेमे ने आरोप लगाया था कि अशोक गहलोत का पूरा ध्यान बेटे की सीट जोधपुर पर ही लगा रहा और उन्होंने बाकी जगह पर मुश्किल से प्रचार किया।

इसके बाद मेयर पद पर उम्मीदवारों के चयन और कोटा के अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत के मुद्दे पर सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच के मतभेद खुलकर सामने आए। बच्चों की मौत पर जहां अशोक गहलोत ने इसके लिए पूर्व की सरकार को जिम्मेदार ठहराया। वहीं सचिन पायलट ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को ज्यादा संवेदनशीलता से संभाल सकती थी।

वहीं भाजपा नेताओं का इस पूरे मसले पर कहना है कि वह फिलहाल देखो और इंतजार करो की नीति अपना रहे हैं लेकिन उन्हें ये लगता है कि कांग्रेस पार्टी में संकट गहरा रहा है।

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