शिवसेना यूबीटी के प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने गुरुवार को मुंबई में 26 जुलाई को एक संयुक्त मार्च निकालने की घोषणा की है। साथ ही बताया कि यह जुलूस केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे छात्रों और सीजेपी के समर्थकों के समर्थन में होगा।

उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह असहमति का जवाब बातचीत के बजाय बल का इस्तेमाल कर रही है। साथ ही राज ठाकरे धमकाते हुए कहा कि अगर कोई मार्च में हिंसा करेगा तो वे सख्ती से निपटेगें।

कहां से शुरू होगी मार्च?

एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ठाकरे भाइयों ने कहा कि यह मार्च शिवाजी पार्क से शुरू होगा और सिद्धिविनायक मंदिर पर समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि मार्च में शामिल लोग केवल तिरंगा साथ रखेंगे और उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और सभी राजनीतिक विचारधाराओं के नागरिकों से इस रैली में शामिल होने की अपील की।

‘अब यह धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रहा’

राज ठाकरे ने कहा यह मुद्दा अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से कहीं आगे बढ़ चुका है। उन्होंने कहा, “शुरुआत में मांग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, लेकिन जिस तरह से छात्रों की पिटाई की गई, उसके बाद यह मुद्दा अब सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रहा है, पर अब यह प्रधानमंत्री तक पहुंच गया है। अगर सरकार ने इन छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया होता और उनकी चिंताओं को समझा होता, तो स्थिति कभी भी इस हद तक नहीं बिगड़ती।”

उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा जन-आंदोलनों से निपटने के तरीके की भी आलोचना की। राज ने कहा, “किसानों के आंदोलन के दौरान भी उन्होंने किसी से मिलने से इनकार कर दिया था। मणिपुर में भी ऐसा ही हुआ। जब भी कोई जन-आंदोलन होता है, तो उनकी पहली प्रतिक्रिया उसे सुनने के बजाय कुचलने की होती है।”

उद्धव ठाकरे ने की केंद्र की आलोचना

उद्धव ठाकरे ने भी आरोप लगाया कि छात्रों से बातचीत करने से इनकार करके केंद्र ने आंदोलन को और बढ़ने दिया और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कथित कार्रवाई की आलोचना की।

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ अपनी मुलाकात का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने उनसे अपना अनशन खत्म करने को कहा था। अनशन ऐसे लोगों के सामने करना चाहिए जिनमें थोड़ी संवेदनशीलता हो। इस सरकार में कोई संवेदनशीलता नहीं है।”

दोनों नेताओं ने दी गुडों को चेतावनी भी

दोनों नेताओं ने 26 जुलाई के मार्च को बाधित करने की कोशिशों के खिलाफ भी चेतावनी दी। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात लोगों ने हाल के विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ करने की कोशिश की थी और कहा कि मुंबई रैली के दौरान ऐसी किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा, साथ ही उन्होंने जोर दिया कि मार्च शांतिपूर्ण रहेगा।

इसके अलावा राज ठाकरे ने अराजकतत्वों को धमकाया भी। उन्होंने कहा, “अगर 26 जुलाई को होने वाले विरोध प्रदर्शन में कोई गुंडा घुसता है, तो हम उनकी पिटाई करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने दिल्ली में किया था। इसलिए, ऐसे लोगों को मेरे विरोध प्रदर्शन से दूर रहना चाहिए। सरकार को इस पर बातचीत शुरू करनी चाहिए थी। आज विरोध प्रदर्शन बढ़ गए हैं, इसलिए सरकार डरी हुई है। आज प्रधानमंत्री डरे हुए हैं; इसीलिए वे ट्वीट कर रहे हैं। मैं पुलिस अधिकारियों से बस एक ही बात कहूंगा कि वे ऐसा करके हिंसा न भड़काएं।”

उनका मकसद खोई हुई जमीन वापस पाना है- CM

मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मुंबई में NEET पेपर लीक के खिलाफ ठाकरे भाइयों के मार्च निकालने के फैसले को राजनीतिक जुमला बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों नेता छात्रों के चल रहे विरोध-प्रदर्शन का इस्तेमाल करके अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं।

देवेंद्र फड़नवीस ने कहा, “शिवसेना (यूबीटी) और मनसे अपनी पार्टियों पर राजनीतिक पकड़ खोने के बाद अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। इसलिए, वे छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर उस ज़मीन को वापस पाने की कोशिश कर रही हैं जो जनता द्वारा नकारे जाने के बाद उनके हाथों से निकल चुकी है।”

NEET पेपर लीक और TET घोटाले की तुलना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) परीक्षा का सबसे बड़ा घोटाला महा विकास अघाड़ी (MVA) के शासनकाल में हुआ था, जब उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे।”

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मानसून के कारण मिसिंग लिंक को लेकर मचे राजनीतिक घमासान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद पैदा कर दिया है। मिसिंग लिंक को लेकर राज्य सरकार की आलोचना हो रही है। इसे लेकर विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने आलोचकों की तुलना कुत्ते से कर दी थी। अब इसी पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने मुख्यमंत्री से सवाल किए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें