दिल्ली: बारिश ने तोड़ा 11 साल का रेकॉर्ड साल 2010 के बाद पहली बार राजधानी में 1,000 मिमी से ज्यादा गिरा पानी

एक सितंबर को 112.1 मिमी और दो सितंबर को 117.7 मिमी वर्षा हुई। इस महीने अब तक 248.9 मिमी वर्षा हुई है, जो सितंबर के औसत 129.8 मिमी बारिश से काफी ज्यादा है।

Heavy rain, Mansoon
शनिवार को भारी बारिश की वजह से जहांगीरपुरी क्षेत्र में पानी भरी सड़क से होकर जाती महिला। (फोटो- पीटीआई)

दक्षिण पश्चिमी मानसून दिल्ली में अस्थिर रहने के बाद सबसे देर से आने वाले मानसून में शामिल हो गया, बावजूद इसके राष्ट्रीय राजधानी में 11 साल में अब तक सबसे ज्यादा 1,005.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की है। साल 2010 के बाद पहली बार है जब दिल्ली में मानसून की बारिश ने 1,000 मिमी का रेकॉर्ड तोड़ा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) के मुताबिक, सफदरजंग वेधशाला में वर्षा ऋतु के दौरान आम तौर पर औसतन 648.9 मिमी वर्षा दर्ज की जाती है। एक जून को मानसून का मौसम शुरू होने से 10 सितंबर तक यहां 586.4 मिमी बारिश होती है। दिल्ली में 13 जुलाई को मानसून पहुंचा था जो 19 वर्षों के इतिहास में सबसे देर से आया।

इसके बावजूद, राजधानी में महीने में 16 दिन बारिश हुई जो पिछले चार साल में सबसे ज्यादा है। दिल्ली में इस महीने की शुरुआत में लगातार दो दिनों में 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। एक सितंबर को 112.1 मिमी और दो सितंबर को 117.7 मिमी वर्षा हुई। इस महीने अब तक 248.9 मिमी वर्षा हुई है, जो सितंबर के औसत 129.8 मिमी बारिश से काफी ज्यादा है।

जुलाई में 507.1 मिमी बारिश हुई जो औसत 210.6 मिमी से बहुत ज्यादा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह से बारिश होने से भूजल के पुनर्भरण में मदद नहीं मिलती है बल्कि निचले इलाकों में पानी भर जाता है।

वहीं, शुक्रवार को दिल्ली के कुछ इलाकों में हल्की बारिश के साथ नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत एनसीआर के कुछ इलाकों में मध्यम स्तर की बारिश हुई है। सुबह चार बजे के बाद हुई बारिश से मौसम का मिजाज बदला। देर शाम तेज बारिश और आंधी भी आई। शनिवार के लिए नारंगी व अगले दो दिन के लिए पीली चेतावनी भी जारी कर दी गई है। शनिवार सुबह भी बारिश होती रही।

हालांकि हल्की बारिश में ही दिल्ली के कई इलाकों में पानी भर गया। इससे निचले क्षेत्रों मे रहने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बाजारों और कॉलोनियों में भी कई जगह यही हालात रहे। ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाले लोगों के घरों में भी पानी चला गया। इसकी वजह से लोगों के सामने संकट की स्थिति रही।

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