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कांग्रेस उपाध्यक्ष की टेंशन बढ़ी, Food Park के बाद राहुल गांधी से छिन सकती पेपर मिल

एनडीए सरकार आते ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के हाथ से अमेठी की फूड पार्क पॉलिसी चली गई और अब महाराष्ट्र के रत्नगिरी पेपर मिल भी छीनने की कवायद जोरों पर है।

Author नई दिल्ली | December 10, 2015 11:08 AM
(File Pic)

केंद्र से मनमोहन सरकार जाने और मोदी सरकार के आते ही कांग्रेस के लिए एक के बाद एक मुश्लिकल खड़ी हो रही है। एनडीए सरकार आते ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के हाथ से अमेठी की फूड पार्क पॉलिसी चली गई और अब महाराष्ट्र के रत्नगिरी पेपर मिल भी छीनने की कवायद जोरों पर है।

यानी जब से बीजेपी का वर्चस्व केंद्र में आया तब राहुल के संसदीय क्षेत्र अमेठी की विकास परियोजनाओं पर असर दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के अमेठी से पहले फूड पार्क की परियोजना चली गयी और अब वहां लगने वाली पेपर मिल भी महाराष्ट्र के रत्नागिरी जा सकता है। रत्नागिरि जिले में 3,650 करोड़ रुपये की लागत से एक पेपर मिल लगाने का प्रस्ताव है.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कैबिनेट इस बारे में जल्द ही कोई फैसला करेगी। कैबिनेट मंत्री अनंत गीते ने बुधवार को बताया कि भारी उद्योग विभाग ने इस सिलसिले में वित्त मंत्रालय को लिखा है। उद्योग मंत्री अंनत गीते ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वित्त मंत्रालय को चिट्ठी लिखी गयी है और अन्य मंत्रालयों से भी राय मांगी गई है।

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महाराष्ट्र में इस मिल को लगाए जाने की अनंत गीते की मांग के बाद रत्नागिरि को चुना गया है। माना जा रहा है कि इस परियोजना से 900 लोगों को रोजगार मिलेगा। गौरतलब है कि पेपर मिल से पहले सरकार ने जगदीशपुर में एक मेगा फूड पार्क लगाए जाने का प्रस्ताव भी खारिज कर दिया था।

तब लोकसभा में राहुल गांधी ने शक्तिमान फूड पार्क का मसला भी उठाया था और मोदी सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया। हालांकि केंद्र सरकार ने इन आरोपों के जवाब में कहा कि खुद UPA सरकार में पेट्रोलियम मंत्रालय ने अमेठी को रियायती दरों पर गैस की आपूर्ति करने से मना कर दिया था और इसी वजह से अमेठी में मेगा फूड पार्क शुरू नहीं किया जा सका। UPA के दौर में अमेठी और उसके आस-पास की जगहों के लिए कई परियोजनाओं की घोषणा की गईं लेकिन उनमें से ज्यादातर अभी तक शुरू नहीं हो पाई हैं।

 

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