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मायावती ने दलित नेतृत्व को बसपा में दबाया : राहुल

राहुल गांधी ने कहा कि कांशीराम के लिए उनके मन में सम्मान है लेकिन जो प्लेटफार्म उन्होंने मायावती को दिया, उसका इस्तेमाल मायावती ठीक ढंग से नहीं कर पार्इं।

Author लखनऊ | February 19, 2016 2:22 AM
राहुल गांधी ने मायावती पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी में दलित नेतृत्व को दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

उत्तर प्रदेश में अपना वजूद बचाए रखने की जंग लड़ रही कांग्रेस दलितों को वापस लाने की अथक कोशिश में है। गुरुवार को कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय पर आयोजित दलित नेतृत्व विकास सम्मेलन में पार्टी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो दलितों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। राहुल गांधी ने बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पार्टी में दलित नेतृत्व को दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने 1989 से पार्टी से दूर गए दलितों को कांग्रेस में वापस लाने के लिए जिस सम्मेलन का आयोजन कर भीड़ जुटाने के जो दावे किए थे, उसमें वह पूरी तरह नाकाम दिखाई दी। कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय पर कुछ सौ लोगों की भीड़ के बीच पहुंचे राहुल गांधी ने दलितों को कांग्रेस में वापस लाने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांशीराम के लिए उनके मन में सम्मान है लेकिन जो प्लेटफार्म उन्होंने मायावती को दिया, उसका इस्तेमाल मायावती ठीक ढंग से नहीं कर पार्इं। इसलिए आज कांग्रेस के सामने बड़ा मौका है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में दलितों का हाथ पकड़ लिया तो उसे सत्ता में आने से रोका नहीं जा सकता है।

राहुल ने वित्त मंत्री अरुण जेटली और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने संसद में कहा कि वह मनरेगा को कभी बंद नहीं करेंगे क्योंकि वह देश को दिखाना चाहते हैं कि इतनी बड़ी फ्लाप योजना कोई दूसरी नहीं थी। हालांकि जेटली ने खुद उनके कमरे में आकर मनरेगा की मुक्त कंठ से तारीफ की थी। जेटली के साथ कमरे में हुए संवाद का जिक्र सार्वजनिक करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मैंने वित्त मंत्री से पूछा कि जिस मनरेगा की वह प्रशंसा कर रहे हैं, उसे कमरे के बाहर जाकर क्यों नहीं कहते? तो वह मौन हो गए थे।

उत्तर प्रदेश में दलितों को साथ लाने की अथक कोशिश में जुटी कांग्रेस के नेताओं से राहुल गांधी ने पिछले कई मर्तबा की तरह इस बार भी कहा कि वे गावों और कस्बों में जाकर दलितों को कांग्रेस के साथ जोड़ें। दलितों के घर रात्रि प्रवास और उनकी रसोई का खाना खाने पर विपक्ष की आलोचना का लगातार शिकार होने पर राहुल गांधी ने सफाई पेश करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि मैं पंक्ति में सबसे पीछे खड़े शख्स के पास तक पहुंच कर उसकी परेशानियों को समझना चाहता था। मैं उसमें कामयाब भी हुआ। जो लोग समाज के सबसे पीछे खड़े शख्स तक नहीं पहुंच पाते, उन्हें मेरा यह कृत्य खटकता है। हैदराबाद में किए गए अनशन की बात करते हुए राहुल गांधी ने रोहित वेमुला का जिक्र किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाए कि उसकी गलत नीतियों के चलते रोहित वेमुला की जान गई। उन्होंने कहा कि रोहित ने आत्महत्या नहीं की बल्कि उसकी हत्या की गई। रोहित के मन में जो दर्द था, उसे वह जाहिर करना चाहता था। उन्होंने कहा कि जब उसने विश्वविद्यालय में बोलना शुरू किया तो सरकार ने अपना पूरा वजन उस पर डाल दिया।

भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए राहुल बोले, वे शिक्षा में एक विचारधारा लाने की कोशिश कर रहे हैं। कुलपतियों की नियुक्ति के सवाल पर राहुल गांधी ने आरोप लगाए कि जितने भी कुलपति नियुक्त किए जा रहे हैं। वे सभी आरएसएस मानसिकता के लोग हैं। रोहित वेमुला जिस विश्वविद्यालय में पढ़ते थे, वहां के कुलपति भी इसी मानसिकता से ग्रस्त हैं। दलित नेतृत्व सम्मेलन में कांग्रेस ने दलितों के उत्थान के लिए घोषणापत्र भी पढ़ कर सुनाया जिसमें प्रदेश व देश में कांग्रेस की सरकार बनने पर दलितों को उचित स्थान व सम्म्मान देने के सपने दिखाए गए हैं। लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोरे सपने दिखाकर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में दलितों के दिलों में जगह बना पाने में कामयाब हो पाती है।

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