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दहशत ही दहशत…यूपी के इस गांव में 17 मौतें, कोरोना के रिकॉर्ड में केवल दो, डर के साये में जी रहे लोग

गांव के बाहर एक लकड़ी का बैरियर लगा हुआ है। जहां बैठे अविनाश प्रसाद नाम के एक शख्स ने कहा "गांव में कोविड है। सरकार ने इसे कन्टेनमेंट जोन बना दिया है, यहां एक महीने में 18 लोगों की मौत हो गई है।"

Translated By सिद्धार्थ राय बरेली | Updated: May 13, 2021 10:03 AM
बरेली जिले के सुल्तानपुर खेरा गांव में अबतक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। (Express photo by Praveen Khanna)

कोविड-19 की दूसरी लहर का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के सुल्तानपुर खेरा गांव में संक्रमण पैर पसार रहा है और अबतक यहां 18 लोगों की मौत हो चुकी है। गांव में दहशत का माहौल है और लोग डर के साये में जी रहे हैं। गांव के बाहर एक लकड़ी का बैरियर लगा हुआ है। जहां बैठे अविनाश प्रसाद नाम के एक शख्स ने कहा “गांव में कोविड है। सरकार ने इसे कन्टेनमेंट जोन बना दिया है, यहां एक महीने में 18 लोगों की मौत हो गई है।

यह सुल्तानपुर खेरा गांव के प्रवेश करने का एक एंट्री पॉइंट है। बैरियर के उस पार प्रसाद का घर है। जहां वह अपने परिवार के सदस्यों के संग आंगन में एक खाट पर बैठे हैं। प्रसाद ने कहा “कोई घर से बाहर नहीं आ रहा है। गांव में दहशत ही दहशत है। पास में बैठे दिनेश सिंह जो की एक बैंक कर्मचारी हैं ने एक सूची पढ़ना शुरू किया। इस सूची में पिछले महीने मरने वालों के नाम लिखे थे। इसमें 18 में से 17 लोग ऐसे थे जिनकी मौत कोरोना के लक्षणा आने के बाद हुई।

इंडियन एक्सप्रेस ने उनमें से 11 परिवारों से बात की और मौत से पहले बुखार, खांसी, सर्दी, सिरदर्द और सांस फूलने जैसे लक्षणों की उपस्थिति की पुष्टि की। दिनेश सिंह ने कहा “कई दिनों तक हमें लगा यह सामान्य सर्दी और खांसी है। जब लोग मरने लगे तो हम घबरा गए।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि 17 मौतों में से 15 का कोविड टेस्ट नहीं किया गयाम ना ही उन्हें अस्पताल ले जाया गया। यह कारण है कि अप्रैल के महीने के आधिकारिक आंकड़ों में मरने वालों की संख्या सिर्फ दो ही दिखाई जा रही है। दिनेश सिंह ने कहा ” जो अठारहवीं मौत हुई है, वह एक युवती की थी। उसे जन्मजात हृदय की बीमारी थी। उसे कोरोना नहीं हुआ था।”

गांव के निवासियों का कहना है कि गांव ने एक महीने पहले तक कभी 18 मौतें नहीं देखीं थी। दिनेश सिंह ने कहा, “हमारे जैसे छोटे गांव में, शायद कभी एक या दो मौत होती थी। कई महीने ऐसे भी होते हैं जब कोई नहीं खत्म होता। गांव में जब कोई मर जाता है, तो सभी को पता लगता हैं।”

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