दयाल सिंह सांध्य को सुबह का कॉलेज बनाने पर उठे सवाल- questioned on dyal singh college making evening college - Jansatta
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दयाल सिंह सांध्य को सुबह का कॉलेज बनाने पर उठे सवाल

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) का दयाल सिंह कॉलेज सांध्य जल्द ही सुबह की पाली में शुरू होने जा रहा है। 20 जून को विश्वविद्यालय विद्वत परिषद (एसी) की होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है।

Author नई दिल्ली | June 17, 2017 12:52 AM

सुशील राघव
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) का दयाल सिंह कॉलेज सांध्य जल्द ही सुबह की पाली में शुरू होने जा रहा है। 20 जून को विश्वविद्यालय विद्वत परिषद (एसी) की होने वाली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है। इस फैसले से पहले ही दयाल सिंह कॉलेज के शिक्षकों ने इसकी आवश्यकता पर सवाल उठा दिए हैं। दयाल सिंह कॉलेज में भूगोल के एसोसिएट प्रोफेसर पीके परिहार का कहना है कि अभी डीयू में कॉलेजों की बहुत कमी है। ऐसे में अधिक विद्यार्थियों को दाखिला दिलाने के लिए कई राजनीतिक दलों की ओर से सभी कॉलेजों में सांध्य कक्षाएं चलाने के प्रस्ताव भी सामने आए हैं। दूसरी ओर, एक बेहतर स्थिति में चल रहे सांध्य कॉलेज को सुबह की पाली में चलाने का फैसला किया गया है। ये दोनों बातें एक-दूसरे के उलट हैं।

प्रोफेसर परिहार कहते हैं कि कॉलेज के पास जमीन का बहुत अभाव है। दिल्ली मेट्रो ने कॉलेज की काफी जमीन का अधिग्रहण कर लिया है। इसके अलावा पिछले सालों में नए पाठ्यक्रमों की वजह से कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ी है। उनका कहना है कि ऐसे में एक कॉलेज की जगह में दो कॉलेज वह भी एक साथ चलाने का कोई औचित्य समझ नहीं आता है। प्रोफेसर परिहार ने बताया कि दोनों कॉलेजों के प्राचार्य इस बात पर सहमत हो गए हैं कि दोनों कॉलेज के छात्र व शिक्षक वर्तमान में उपस्थित सुविधाओं (पुस्तकालय, सभागार, भोजनालय आदि) का साझा उपयोग करेंगे। परिहार इस पर भी सवाल उठाते हुए कहते हैं कि जो सुविधाएं एक कॉलेज के छात्रों के हिसाब से बनाई गई हैं, ऐसे में समानांतर पाली में चलने वाले दो कॉलेजों के छात्र व शिक्षक इन सुविधाओं का एक साथ इस्तेमाल कैसे करेंगे?

दयाल सिंह कॉलेज में ही पढ़ाने वाले राजीव कुंवर कहते हैं कि हम इस बात से सहमत हैं कि सांध्य पाली में देर तक चलने वाली कक्षाओं से विशेषकर लड़कियों को काफी परेशानी होती है। लेकिन इसका समाधान कॉलेज का बंटवारा नहीं है बल्कि यहां कक्षाएं बढ़ाई जाएं। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय में जब चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किया गया था तो विश्वविद्यालय ने अपने उन कॉलेजों को सुबह की पाली में चलाने का विचार सामने लाया था जो सांध्य चल रहे थे। इनमें रामलाल आनंद कॉलेज सांध्य को आर्यभट्ट कॉलेज और देशबंधु कॉलेज सांध्य को रामानुजन कॉलेज में बदल दिया गया। प्रोफेसर परिहार कहते हैं कि इन दोनों कॉलेजों के पास पर्याप्त जमीन थी, ऐसे में वहां कोई परेशानी नहीं हुई। लेकिन दयाल सिंह कॉलेज के साथ ऐसा कर पाना संभव नहीं है क्योंकि यहां जमीन का बहुत अभाव है। वर्तमान में दयाल सिंह कॉलेज और दयाल सिंह कॉलेज सांध्य की गवर्निंग बॉडी एक ही है।

कैसे संभव होगी संसाधनों की साझीदारी
दोनों कॉलेजों के प्राचार्य इस बात पर सहमत हो गए हैं कि दोनों कॉलेज के छात्र व शिक्षक वर्तमान में उपस्थित सुविधाओं (पुस्तकालय, सभागार, भोजनालय आदि) का साझा उपयोग करेंगे। जो सुविधाएं एक कॉलेज के छात्रों के हिसाब से बनाई गई हैं, ऐसे में समानांतर पाली में चलने वाले दो कॉलेजों के छात्र व शिक्षक इन सुविधाओं का एक साथ इस्तेमाल कैसे करेंगे?
-पीके परिहार, दयाल सिंह कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर

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