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नौकरियों का लालच देकर एनजीओ बेच रहे लड़कियां, संसद में सरकार ने कहा-हां ये सच है

नौकरियों के नाम पर नाबालिग लड़कियों को बेचे जाने की बात खुद केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में स्वीकार की। एक लिखित सवाल के जवाब में केंद्रीय गृहमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने माना कि झारखंड के अपराध अन्वेषण विभाग(सीआइडी) ने ऐसी घटनाओं की पुष्टि की है।

Author नई दिल्ली | July 24, 2018 4:46 PM
संसद में सरकार ने लिखित सवालके जवाब में बताया कि झारखंड में नौकरियों के बहाने लड़कियों की तस्करी का खेल चल रहा है।

समाज की भलाई के नाम पर बने कई एनजीओ इसकी आड़ में गंदा खेल खेल रहे हैं। हर साल हजारों गरीब लड़कियों को जिस्मफरोशी के दलदल में धकेल रहे हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें झारखंड से आ रहीं हैं। यहां आदिवासियों की बस्तियों में समाजसेवा का ढोंग रचाकर कई एनजीओ लड़कियों को बरगलाने में जुटे हैं। 10 से 17 साल तक की अविवाहित लड़कियों को नौकरियों का लॉलीपाप लेकर उन्हें शहर ले जाकर बेचने का खेल चल रहा है। नौकरियों के नाम पर नाबालिग लड़कियों को बेचे जाने की बात खुद केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में स्वीकार की। एक लिखित सवाल के जवाब में केंद्रीय गृहमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने माना कि झारखंड के अपराध अन्वेषण विभाग(सीआइडी) ने ऐसी घटनाओं की पुष्टि की है। राज्य के अनुसूचित जनजाति-बाहुल्य इलाकों की नाबालिग लड़कियों को रोजगार दिलाने के नाम पर उन्हें बेचने की घटनाएं सामने आईं हैं।
एक्शन के लिए 8 जिलों में खुलीं विशेष थानेः झारखंड के बीजेपी सांसद रवींद्र राय के सवाल पर केंद्र सरकार ने बताया कि झारखंड सरकार ने संबंधित एनजीओ और प्लेसमेंट इकाइयों के खिलाफ एक्शन के लिए कवायद शुरू की है। शिकायत वाले आठ जिलों में मानव तस्करी रोधी इकाई थानों का गठन किया गया है। जिला विकास आयुक्त, जिला कल्याण अधिकारी को जहां लड़कियों की तस्करी रोकने का जिम्मा है, वहीं पुलिस विभाग, जिला कल्याण और श्रम अधिकारी को बच्चों को बचाने वहीं जिला शिक्षाधिकारी, सहायक श्रमायुक्त को उनके पुनर्वास की ड्यूटी दी गई है।
यूं हो रही तस्करीः स्थानीय लोगों के मुताबिक झारखंड और सटे छत्तीसगढ़ के जनजातीय इलाकों में कुछ दलाल सक्रिय हैं। जो कुछ एनजीओ और प्लेसमेंट एजेंसियों के लिए काम करते हैं। गरीब आदिवासी परिवारों को पहले चिह्नित करते हैं। फिर मां-बाप के हाथ में दस से 15 हजार रखकर नाबालिग लड़कियों को शहर में नौकरी दिलाने की बात कहते हैं। कई परिवारों को बरगलाकर वे एक साथ थोक में तमाम लड़कियों को साथ लेकर दिल्ली, मुंबई सहित कई अन्य शहरों में चले जाते हैं। जहां बाद में लड़कियों को अपने साथ धोखे का खुलासा होता है। उन्हें नौकरी तो नहीं मिलती मगर जिस्मफरोशी के दलदल में जरूर फंसना पड़ता है।

झारखंड में कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने जब लड़कियों की तस्करी को लेकर सर्वे किया तो चौंकाने वाली बातें सामने आईं। आंकड़े के मुताबिक ढाई सौ से अधिक प्लेसमेंट एजेंसियां हर साल करीब 18 हजार लड़कियों को बेचने का काम कर रहीं हैं। इनमें ज्यादातर प्लेसमेंट एजेंसियां दिल्ली की हैं। सूत्रों के मुताबिक दलालों को हर लड़की के पीछे 50 हजार रुपये तक मिलते हैं। फिर एजेंसियां इन लड़कियों को एक से दो लाख रुपये में कोठों पर बेचतीं हैं। ऐसा ही एक मामला पिछले साल दिसंबर 2017 में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी इलाके से आया था। जहां एक लड़की ने प्लेसमेंट एजेंसी पर नौकरी के नाम पर जिस्मफरोशी के धंधे में उतारने की शिकायत दर्ज कराई थी। लड़की ने कहा था कि एजेंट 60 लड़कियों को लेकर ओडिशा लेकर गया, जहां उन्हें जिस्म के सौदागरों के हवाले कर दिया गया। किसी तरह वह भागकर घर पहुंची।

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