राजधानी में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से प्रस्तावित नए उपरिगामी पैदल पारपथों (एफओबी) के निर्माण पर अब अड़चनें आ गई हैं। विभाग ने कई जगहों पर प्रस्ताव तैयार किए, जहां अनुमति नहीं है या विभाग के पास जमीन का अधिकार ही नहीं है। इनमें डीएमआरसी स्टेशन की जमीन, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ), रेलवे, जेएनयू और एमसीडी की जमीन शामिल है। परिणामस्वरूप कई प्रस्ताव रद्द किए गए हैं और कुछ में संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर बदलाव किए जाएंगे।
लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाल ही में हुई फुटओवर ब्रिज/सबवे समिति की बैठक में यह खुलासा हुआ कि विभाग ने कई प्रस्ताव तैयार करने से पहले संबंधित विभागों से कोई परामर्श नहीं किया। इसके कारण कुतुब मीनार के पास प्रस्तावित एफओबी को एएसआइ ने सुरक्षा कारणों से रद्द कर दिया।
एएसआइ की ओर से नौ जनवरी को एक पत्र भी लिखा गया और कहा गया कि संरक्षित स्मारक के 100 मीटर के दायरे में निर्माण की इजाजत नहीं है। लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, बीआरटी गलियारा, बिरला विद्या निकेतन क्रासिंग और मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन के पास के एफओबी प्रस्ताव भी रद्द किए गए।
वहीं, कटवारिया सराय, लाल बहादुर और बेर सराय मार्केट सहित कई जगहों पर भूमि की कमी और स्थानीय आपत्तियों के कारण प्रस्तावों पर पुनर्विचार करना होगा। इसके लिए अब जेएनयू विश्वविद्यालय से सीढ़ियां, स्वचालित सीढ़ियां या फिर लिफ्ट लगाने के लिए 100 वर्ग मीटर जगह की दरकार है। इसी तरह से वेलकम-कट, जीटी रोड पर प्रस्तावित उपरिगामी पैदल पारपथ बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग के पास पर्याप्त जमीन नहीं है। इसके लिए निगम से एमसीडी पार्क का कुछ हिस्सा मांगा गया है।
इसी तरह से श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के निकास द्वार के पास के एफओबी के लिए जमीन के इस्तेमाल के लिए रेलवे से भी एनओसी लेने की जरूरत महसूस की गई है। हालांकि, उत्तम नगर पूर्वी टर्मिनल, हनुमान मंदिर (जमना बाजार) रिंग रोड नजदीक परमानंद अस्पताल समेत कई प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं जिनका निर्माण कार्य 31 जुलाई तक पूरा करने का निर्देश भी दिया गया है।
