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अमरिंदर सरकार के दो मंत्री आपस में उलझे, एक ने कहा- कुत्तों के भरोसे नहीं छोड़ सकता पंजाब, दूसरे ने पूछा- कौन है कुत्ता?

पंजाब सरकार के दो मंत्रियों के बीच इन दिनों टकराव तेज हो गया। एक ने कहा कि पंजाब को कुत्तों के हवाले नहीं कर सकते, तो दूसरे ने पूछा कि कुत्ता कौन है? ऐसे शब्दों का इस्तेमाल विरोधियों के लिए भी नहीं होना चाहिए।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

पंजाब में कैप्टन अमरिंद सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल दो मंत्री इन दिनों आमने-सामने आ गए हैं। इनमें एक हैं स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और दूसरे हैं पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री राजिंदर सिंह बाजवा। दोनों में काफी पहले से ही अवैध कॉलनी के मुद्दे को लेकर टकराव चल रहा है। इधर सिद्धू के एक बयान से सियासी सरगर्मी बढ़ गई। दरअसल सिद्धू ने कहा कि पंजाब को कुत्तों हवाले नहीं छोड़ सकता है। उनके इस बयान पर बाजवा ने पूछा कि कौन कुत्ता? ऐसे शब्द का इस्तेमाल तो विरोधियों के लिए भी नहीं किया जाना चाहिए। अगर उन्होंने इसका इस्तेमाल अकाली दल और आम आदमी पार्टी के लिए भी किया है, तो गलत बात है। सिद्धू को बताना चाहिए उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल किसके लिए किया। अब सिद्धू सफाई दे रहे हैं कि उनकी बात को तोड़ मरोड़ कर फैलाया जा रहा है। मैंने सीधे किसी का नाम नहीं लिया।

दरअसल, एक दिन पहले सिद्धू ने कहा था कि मैं पंजाब को कुत्तों के आगे नहीं फेंकने दूंगा। जब उनसे इस बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैंने मुहावरे के रूप में इसका इस्तेमाल किया था। यहां लोग इसका गलत अर्थ निकाल रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि लोहे के चने चबाना का मतलब कोई यह निकाल ले कि मुंह से चने चबाना है तो उसके बारे में मैं क्या कह सकता हूं। मैंने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया है। इसे बेवजह का मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है। वहीं, सिद्धू के बयान पर राजिंदर सिंह बाजवा ने कहा कि सिद्धू को उनका नाम बताना चाहिए कि वे कुत्ते कौन हैं, जिनके हवाले पंजाब नहीं करना चाहिए। वे नाम बताएं ताकि बात को आगे बढ़ाया जाए। एपेक हा बेहता सुझाव को हमने अपनी हर नीति में शामिल किया है। हमें उनकी ईमानदारी का प्रमाणपत्र नहीं चाहिए।

बता दें कि अवैध कॉलनियों को लेकर सिद्धू और बावजा के बीच चल रहे टकराव को लेकर बावजा ने नसीहत देते हुए कहा था कि वह थोड़ा सब्र रखें। कांग्रेस को 78 सीटें कैप्टन अमरिंदर सिंह के बदौलत मिली है, सिद्धू की बदौलत नहीं। हर मामले पर सिद्धू की बात नहीं मानी जा सकती है। सरकार में फैसले सबकी सहमति से होते हैं।

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