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नवजोत सिंह सिद्धू को रोड रेज केस में झटका, SC ने सुनाई एक साल की सजा, जानें क्या है पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने 34 साल पुराने रोड रेज के एक मामले में कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू को एक साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

Navjot Singh Sidhu
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस- साहिल वालिया)

तीन दशक पुराने एक मामले में कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 34 साल पुराने रोड रेज के एक मामले में कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू को एक साल की सजा सुनाई है। इसके पहले, सिद्धू को एक हजार रु का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया था। यह मामला 1988 का है। रोड रेज में जिस शख्स की मौत हुई थी, उसके परिवार ने रिव्यू पीटिशन दायर की थी।

पटियाला के सत्र न्यायाधीश ने 22 सितंबर 1999 को सिद्धू और उनके सहयोगी को इस मामले में सबूतों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। इसके बाद पीड़ित के परिवार ने इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसमें हाई कोर्ट ने 2006 में सिद्धू को तीन साल की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट के इस फैसले को सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता को गैर-इरादतन हत्या के आरोप में लगी धारा आईपीसी की धारा 304 से बरी कर दिया था। कोर्ट ने आईपीसी की धारा 323, यानी चोट पहुंचाने के मामले में सिद्धू को दोषी ठहराया था। इसमें सिद्धू को एक हजार रुपया जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया था। जिसके बाद मृतक के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में गुरुवार को नवजोत सिंह सिद्धू को एक साल कठोरतम कारावास की सजा सुनाई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस नेता को या तो सरेंडर करना होगा या पंजाब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करेगी। सिद्धू इस वक्त पटियाला में मौजूद हैं जहां उन्होंने महंगाई को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

क्या है मामला?

यह मामला 27 दिसंबर 1988 का है, जब नवजोत सिंह सिद्धू का पटियाला में पार्किंग को लेकर 65 साल के गुरनाम सिंह नामक बुजुर्ग व्यक्ति से झगड़ा हो गया था। कांग्रेस नेता पर आरोप है कि झगड़े के दौरान सिद्धू ने कथित तौर पर गुरनाम सिंह के सिर पर वार किया था, जिसके बाद उस शख्स की मौत हो गई थी। इस मामले में पीड़ित पक्ष ने सिद्धू और उनसे सहयोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।

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