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पंजाब में ब्लैकआउट का मंडराया खतरा! कोयले की कमी से बंद हुए 5 थर्मल प्लांट; मालगाड़ियों की आवाजाही पर 7 नवंबर तक लगी है रोक

पंजाब में किसान आंदोलन के चलते मालगाड़ियों की आवाजाही पर रेल मंत्रालय ने रोक लगा दी है। ऐसे में बिजली के प्लांट्स को मिलने वाले कोयले की आपूर्ति में बाधा पैदा हो गई है। अब पंजाब में पावर कट हो रहा है और ब्लैकआउट का खतरा मंडरा रहा है।

Farmers Protest, punjab electricity, punjab trainकृषि कानूनों के खिलाफ आनंदोलन (फाइल फोटो)

पंजाब के स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ने कहा है कि मंगलवार से राज्य में कम से कम दो से तीन घंटे का पावर कट करना पड़ेगा। दरअसल राज्य में पांच थर्मल प्लांट्स में बिजली का उत्पादन बाधित है। किसानों के आंदोलन और रेलवे ट्रैक पर धरने को लेकर रेल मंत्रालय ने राज्य में 7 नवंबर तक रेलगाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस वजह से थर्मल प्लांट्स को कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। एक अधिकारी ने कहा कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो पंजाब में ब्लैकआउट का खतरा है।

PSPCL के चेयरपर्सन ए वेणु प्रसाद ने कहा कि पावर कट चार से पांच घंटे तक भी बढ़ाया जा सकता है। प्राइवेट थर्मल प्लांट नाभा और तलवंडी साबो ने भी बिजली का उत्पादन बंद कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक लेहरा मोहब्बत और रोपड़ा पावर प्लांट में भी दो-तीन दिन का ही कोयला बचा है। इस समय राज्य में 6000 मेगावॉट बिजली की जरूरत है जिसमे से 5000 मेगावॉट केंद्र की तरफ से मिलती है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी कहा कि जमीन पर स्थिति बहुत खराब है। त्योहारों के सीजन में लोगों को बिजली की कमी भी झेलनी पड़ सकती है।

बता दें कि केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में कई किसान संगठन रेल रोको अभियान चला रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहन) उस ट्रैक पर धरना दे रहा है जिसके जरिए राजपुरा और मनसा पावर प्लांट को कोयले की आपूर्ति होती है। वहीं किसान मजदूर संघर्ष समिति के लोग अमृतसर के ट्रैक को ब्लॉक कर रहे हैं। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने पंजाब सरकार से ट्रेनों की सुरक्षा का आश्वासन मांगा है।

अर्थव्यवस्था पर बुरा असर
पंजाब में मालगाड़ियों की आवाजाही रुकने से अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। पंजाब सरकार को प्राइवेट थर्मल पावर प्लांट को अनुबंध के मुताबिक रोज 5 से 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। अनुमान के मुताबिक राज्य को आंदोलन से 40 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। औद्योगिक इकाइयों तक कच्चे माल की आपूर्ति ठप है। खेती में उपयोग होने वाले उर्वरक भी लोगों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

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