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पंजाब: मंत्री के बचाव में सीएम कैप्टन, बोले- इस्तीफा नहीं देंगे नवजोत सिंह सिद्धू

पिछले हफ्ते राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले का समर्थन किया था, जिसमें 1998 के एक मामले में सिद्धू को तीन साल की कैद की सजा सुनाई गई थी।

नवजोत सिंह सिद्धू के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (source Image: PTI)

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंत्रिमंडल सहयोगी और राज्य के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे से इनकार किया है। उन्होंने 30 साल पुराने रोड रेज केस में विपक्ष के बढ़ते हमले के बीच मंत्री का बचाव करते हुए कहा कि सिद्धू कैबिनेट से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पर्यटन और संस्कृति मंत्री सिद्धू से इस्तीफा देने को कहने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। पिछले हफ्ते राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले का समर्थन किया था, जिसमें 1998 के एक मामले में सिद्धू को तीन साल की कैद की सजा सुनाई गई थी।

गौरतलब है कि सिद्धू के घूंसा मारने के बाद पटियाला निवासी गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। अमरिंदर ने कहा कि 30 साल पुराने मामले में उच्चतम न्यायालय में राज्य सरकार के महज अपना रूख दोहराने मात्र से मंत्री के इस्तीफा देने का सवाल नहीं पैदा हो जाता है। गौरतलब है कि विपक्ष की इस्तीफे की मांग के मद्देनजर खबरों में कहा गया था कि सिद्धू से इस्तीफा देने को कहा गया है। बता दें कि शनिवार (14 अप्रैल) को अमरिंदर सिंह ने कोर्ट में पंजाब सरकार के रुख में परिवर्तन से इनकार किया था।

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हालांकि, मुख्यमंत्री ने एक बार फिर से आशा जताई कि जज मामले का फैसला करने में समाज और देश के प्रति सिद्धू के योगदान का संज्ञान लेंगे। कोर्ट में मंत्री का जानबूझ कर समर्थन नहीं करने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक अभियोजन को नया साक्ष्य नहीं मिल जाता, इसके लिए अपनी दलीलों में नयी चीज जोड़ना कानूनन संभव नहीं होगा।

सितंबर 1999 में एक निचली अदालत ने सिद्धू को हत्या के आरोप से बरी कर दिया था। हालांकि उच्च न्यायालय ने इस फैसले को पलट दिया और उन्हें तथा सह आरोपी रुपिंदर सिंह संधू को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया था। उच्च न्यायालय ने उन्हें तीन साल की कैद की सजा सुनाई और प्रत्येक दोषी पर एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट में सिद्धू ने गुरनाम सिंह की मौत हार्ट अटैक से बताया था जबकि सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि गुरनाम सिंह की मौत हार्ट अटैक से हुई है।

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