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मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू का सीएम पर आरोप- दोस्त से कहलवाया, जरा रफ्तार कम रखिए

फास्टवे केबल नेटवर्क पर मुख्यमंत्री का स्टैंड बहुत स्पष्ट है। सरकार प्रतिशोध में शामिल नहीं होगी और अगर कोई भी अनियमितता पाई गई तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा।

फास्टवे केबल नेटवर्क के बारे में बात करते हुए, टैक्स चोरी पर आरोप लगाते हुए सिद्धू ने कहा, मैं इसे कैबिनेट में ले जाऊंगा। (File Photo)

पूर्व क्रिकेटर और स्थानीय निकायमंत्री नवजोत सिद्धू ने पंजाब से सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह पर आरोप लगाया है कि सीएम ने सिद्धू के दोस्त के माध्यम से कहलवाया है कि सिद्धू अपनी रफ्तार जरा कम रखें। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिद्धू ने कहा कि मुझे सीएमओ द्वारा धीमा रफ्तार की सलाह दी गई थी। मुख्यमंत्री ने मेरे दोस्त बन्नी संधु के माध्यम से मुझे मेरी रफ्तार धीमी रखने की सलाह दी। सिद्धू ने कहा कि उनसे सीधे संपर्क नहीं किया गया। उन्होंने बन्नी से कहा कि वह सीएम से मिलेंगे। फास्टवे केबल नेटवर्क के बारे में बात करते हुए, टैक्स चोरी पर आरोप लगाते हुए सिद्धू ने कहा, मैं इसे कैबिनेट में ले जाऊंगा। गेंद अब मुख्यमंत्री की अदालत और मेरे कैबिनेट सहयोगियों के पाले में है।

सीएम अमरिंदर सिंह के मीडिया सलाहकार रवीन ठुकराल ने सिद्धू के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कभी किसी से बात नहीं की और न ही उन्होंने सिद्धू को उनकी रफ्तार कम रखने के लिए कहलवाया है। फास्टवे केबल नेटवर्क पर मुख्यमंत्री का स्टैंड बहुत स्पष्ट है। सरकार प्रतिशोध में शामिल नहीं होगी और अगर कोई भी अनियमितता पाई गई तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा।

सिद्धू के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के वकील और केबल व ब्रॉडकास्टिंग मामलों के विशेषज्ञ विनीत भगत भी मौजूद थे। भगत ने बताया कि 1995 में एक केबल कनेक्शन पर पचास रुपये एंटरटेनमेंट टैक्स लगता था। 2010 में सरकार ने एक प्रोपराइटर पर 15 हजार रुपये प्रति वर्ष टैक्स लगा दिया, चाहे उसके पास जितने भी कनेक्शन क्यों न हों। हालांकि, वसूल यह भी नहीं किया गया। जबकि उसी दौरान डीटीएच पर दस प्रतिशत टैक्स लगा दिया गया।

कम्पीटिशन कमीशन ऑफ इंडिया की 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में 42 लाख सेट टॉप बॉक्स थे, जिनमें से 40 लाख फास्टवे के थे। इन पर टैक्स जोड़ा जाए तो 1440 करोड़ बनता है, गहराई से जांच करने पर आंकड़ा बीस हजार करोड़ तक पहुंच सकता है। अब ये 80 लाख कनेक्शन होंगे, जिनमें से 95 फीसदी फास्टवे के हैं। एकाधिकार के चलते फास्टवे यहां एक ऑपरेटर से 130 रुपये लेता है। जबकि, यूपी में साठ रुपये राजस्थान में 70 रुपये लिए जाते हैं। ट्राई के मुताबिक भी पंजाब में 24 लाख कनेक्शन हैं, जिनमें से 22 लाख फास्टवे के पास है।

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