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भाईचारे की गजब मिसाल! मुसलमानों ने खोल दिए मस्‍जिद के दरवाजे, सिखों से कहा- पकाओ खाना, लगाओ लंगर

लाल मस्जिद बाद के मुगलकाल से ताल्लुक रखती है और यह सैफूद्दीन को समर्पित है जो कि शैख अहमद फारुकी सिरहिंदी के पौते थे।

Author चंडीगढ़ | December 29, 2017 3:56 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

पंजाब में मुस्लिमों द्वारा भाईचारे की मिसाल पेश की गई है। सिखों को लंगर बनाने और बांटने के लिए मुस्लिमों ने सिखों के लिए मस्जिद के दरवाजे खोल दिए और साबित किया कि देश में अभी भी लोगों के अंदर इंसानियत बाकी है। यह मामला राज्य के फतेहगढ़ साहिब का है। इंडिया टाइम्स के अनुसार, मुस्लिमों ने तीन दिवसीय शहीदी मेला के लिए सिखों को ऐतिहासिक लाल मस्जिद के परिसर में लंगर बनाने की इजाजत दी। बता दें कि शहीदी मेला गुरु गोविंद सिह के छोटे साहिबज़ादास के शहीद होने पर मनाया जाता है। लाल मस्जिद बाद के मुगलकाल से ताल्लुक रखती है और यह सैफूद्दीन को समर्पित है जो कि शैख अहमद फारुकी सिरहिंदी के पौते थे। मुस्लिम समुदाय द्वारा दो साल पहले ही इस मस्जिद का पुन:निर्माण कराया गया था।

मस्जिद के इंचार्ज से इजाजत मिलने के बाद रंवान और बाथो गांव के लोगों ने इसके परिसर के अदंर लंगर लगाने का इंतजाम किया। इस मामले पर बात करते हुए रंवान गांव के निवासी चरनजीत सिंह छन्नी ने कहा “मुस्लिम समुदाय ने शहीदी मेले पर लंगर लगाने की इजाजत दे दी है। हम लोगों के लिए खाना बना रहे हैं और तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में लंगर बांट रहे हैं। इस मस्जिद के बेसमेंट का भी हमें इस्तेमाल करने दिया जा रहा है ताकि हम इसमें खाने की चीजों को रख सकें। दोनों गांव के गुरुद्वारों के जरिए इस लंगर को आयोजित किया गया है और स्थानीय निवासी यहां आकर अपनी-अपनी सेवा दे रहे हैं। इंचार्ज से इजाजत मिलने के बाद मुस्लिम भी काफी खुश है कि उन्होंने हमारे धर्म के कार्यक्रम के लिए अपनी जमीन उपयोग के लिए दी है।”

वहीं पटियाला स्थित पंजाबी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर परमवीर सिंह ने बताया कि शैख सिरहिंदी द्वारा सिखों के पांचवे गुरु गुरु अर्जुन देव जी का उत्पीड़न करने में काफी अहम भूमिका रही थी। इसके बावजूद जब बंदा सिंह बहादुर सत्ता में आई तो उन्होंने मस्जिद को नहीं तुड़वाया। ऐसा ही जस्सा सिंह आहलुवालिया और दूसरे सिखों के समय पर भी हुआ जिन्होंने अफगान शासकों को हराया था। सिखों ने ऐसा इसलिए नहीं किया क्योंकि सिख मुस्लिमों या इस्लाम के खिलाफ नहीं थे। वे केवल मुगल शासकों के खिलाफ थे। सिखों को लंगर बनाने और बांटने के लिए जगह देने पर लाल मस्जिद के इंचार्ज खलीफा सयैद मोहम्मद सादिक रज़ा ने कहा “हमें खुशी है कि हम सिख समुदाय के काम आ सके। दूसरे धर्म के लोगों में अलग धर्म के लोगों के लिए कोई गलत धारणा नहीं है लेकिन सत्ता में बैठे लोग और राजनेता ही उनका बंटवारा करना चाहते हैं।”

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