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6 साल पहले डॉक्‍टरों ने मृत घोषित किया था, खुद को जिंदा साबित करने आज तक भटक रहा शख्‍स

यूपी के आजमगढ़ जिले के अमिलो गांव के रहने वाले किसान लाल बिहारी मृतक का मामला भी पूरे देश में खूब चर्चित रहा था। लाल बिहारी आधिकारिक रूप से सन् 1975 से लेकर सन 1994 तक मृतक रहे हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

डॉक्टरों की गलती के कारण मोहाली के एक शख्स को छह साल पहले मृत ठहरा दिया गया था। इस घटना ने सड़क दुर्घटना से बचने के बाद चोटों के लिए मुआवजा पाने की उसकी उम्मीदों को भी खत्म कर दिया। न सिर्फ उसकी जिंदगी को दुख और अवसाद से भर दिया ​बल्कि उसकी शादी की संभावनाओं को भी तबाह कर दिया।

टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहाली जिले के त्रिवेदी कैंप गांव में रहने वाले अमित पांडेय ही वह शख्स हैं जो खुद को जिंदा साबित करने के लिए बीते 6 सालों से संघर्ष कर रहे हैं। जिले और केन्द्र शासित विभाग के अधिकारियों के पास अमित पांडेय अनगिनत चक्कर काट चुके हैं। लेकिन ये सभी मिलकर उस गलती को ठीक नहीं कर पा रहे हैं। ये गलती 30 मई 2012 को ​अमित पांडेय के साथ हुई सड़क दुर्घटना के बाद हुई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमित पांडेय ने कहा,” मैं मोटरसाइकिल से अपने काम पर डेराबस्सी जा रहा था। ढिल्लों फैक्ट्री के पास एक बस ने मुझे पीछे से टक्कर मार दी। मुझे चंडीगढ़ के सेक्टर 32 के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने मेडिकल रिपोर्ट में मुझे मृत घोषित कर करार दे दिया।

डॉक्टरों के मुताबिक, ये मामला गलत पहचान के कारण खड़ा हुआ था। जीएमसीएच के सूत्रों के मुताबिक, ड्यूटी पर मौजूद रेजी​डेंट डॉक्टर ने पांडेय को मृत करार दिया था। उसने मरीज के बारे में अपनी रिपोर्ट लिख दी, जिसे किसी ने भी क्रॉसचेक नहीं किया। एक डॉक्टर ने कहा, ”ऐसी रिपोर्टों को एक कंसल्टेंट के द्वारा पुर्नसत्यापित किया जाना चाहिए। रेजीडेंट डॉक्टर छात्र है और उसे ऐसी गलतियों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।” लेकिन इस भयंकर भूल का खामियाजा पांडेय को कोर्ट में भुगतना पड़ा।

पांडेय ने कहा, ” मेडिकल रिपोर्ट में मेरी मौत के कारण मैं दुर्घटना का केस कोर्ट में हार गया। डेराबस्सी की अदालत ने साल 2014 में इस मामले में संदेह का लाभ देते हुए बस ड्राइवर को बरी कर दिया” अब पांडेय अपने अनचाहे स्टेटस के कारण शादी करने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोग मेरा मजाक उड़ाते हैं। मेरे रिश्तेदार और पड़ोसी मुझे मुर्दा कहकर बुलाते हैं। मैं समाज से हमेशा ही दूर रहने की कोशिश करता हूं। ताकि कोई भी मेरे अस्तित्व पर सवाल न खड़ा करे।

पांडेय ने सरकारी विभागों के अनगिनत चक्कर सिर्फ इसलिए काटे हैं कि वह अधिकारियों को ये भरोसा दिला सकें कि वह जिंदा हैं। पांडेय अपनी समस्या लेकर डेराबस्सी के एसडीएम आॅफिस और जीरकपुर के पुलिस स्टेशन में भी गए लेकिन अधिकारी उनकी बात सुनकर हंसने लगते हैं। अमित पांडेय अब आजिज आ चुके हैं। अमित पांडेय के मुताबिक, मोहाली जिले में उनसे पहले दो और मामले ऐसे हैं, जिनमें जिंदा लोगों को मृतक साबित किया जा चुका है।

वैसे बता दें कि यूपी के आजमगढ़ जिले के अमिलो गांव के रहने वाले किसान और सोशल एक्टिविस्ट लाल बिहारी मृतक का मामला भी पूरे देश में खूब चर्चित रहा था। लाल बिहारी आधिकारिक रूप से सन् 1975 से लेकर सन 1994 तक मृतक रहे हैं। लाल बिहारी ने नौकरशाही के खिलाफ 19 साल तक सिर्फ खुद को जीवित साबित करने की लड़ाई लड़ी थी। लाल बिहारी ने उत्तर प्रदेश मृतक संघ की स्थापना भी की है। ताकि उन लोगों को इंसाफ दिलवाया जा सके जो देश में जिंदा होकर भी सरकारी फाइलों में मुर्दा करार दिए जा चुके हैं।

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