Mohali court sentenced former Punjab Public Service Commission (PPSC) chairman Ravinderpal Singh to seven years of rigorous imprisonment,imposed fine of Rs 75 lakh, corruption case - घूस लेकर इंस्पेक्टर बनाने वाले लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष को 7 साल की जेल, 75 लाख का जुर्माना - Jansatta
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घूस लेकर इंस्पेक्टर बनाने वाले लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष को 7 साल की जेल, 75 लाख का जुर्माना

पीपीएससी के पूर्व चेयरमैन हवाला के जरिए एक करोड़ 36 लाख रुपये विदेश भेजे जाने के मामले में भी आरोपी थे।

प्रतीकात्मक फोटो। (फाइल)

पंजाब लोक सेवा आयोग (पीपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष रविन्दर पाल सिंह को मोहाली की अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा 75 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोका है। रविन्दर पाल सिंह उर्फ रवि सिद्धू को कोर्ट ने 11 जनवरी को घूस लेकर नौकरी बांटने का दोषी करार दिया था लेकिन सजा नहीं सुनाई थी। सोमवार (15 जनवरी) को सजा पर बहस के बाद अदालत ने पूर्व पीपीएससी चेयरमैन को ये सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस मामले में पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया है। सिंह पर घूस लेकर एक्साइज एंड टैक्सेसशन डिपार्टमेन्ट में इन्सपेक्टर के पद पर बहाली कराने के आरोप थे।

पीपीएससी के पूर्व चेयरमैन हवाला के जरिए एक करोड़ 36 लाख रुपये विदेश भेजे जाने के मामले में भी आरोपी थे। सिंह पर फर्जी नाम से अलग-अलग बैंकों में लॉकर रखने के भी आरोप थे। बता दें कि पंजाब के निगरानी विभाग ने 25 मार्च 2002 को गिरफ्तार किया था और भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468 और 120बी के तहत आरोपी बनाया था।

गौरतलब है कि मार्च 2002 में विजिलेंस टीम ने सिद्धू को चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित आवास से रिश्वत लेते रंगो हाथों गिरफ्तार किया था। इसके बाद विजिलेंस ने दर्जनों खुलासे किए थे कि कैसे रविंदर पाल सिंह सिद्धू ने पैसे लेकर राज्य में तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक के पदों पर बहाली करवाई। इस भर्ती घोटाले में तत्कालीन पीपीएससी सचिव प्रितपाल सिंह, चंडीगढ़ निवासी परमजीत सिंह, मोहाली निवासी पुरुषोत्तम सिंह सोढी, प्रो. जसपाल सिंह और प्रो. गुरपाल सिंह को भी आरोपी बनाया गया था लेकिन करीब 16 साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें बरी कर दिया गया। मामले में 3 अन्य आरोपियों की कुछ साल पहले मौत हो चुकी है, जबकि दो आरोपी आज भी भगोड़े चल रहे हैं।

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