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चंडीगढ़ः चीफ जस्टिस के घर के सामने लगा CCTV तो निजता लीक होने का खतरा बता पूर्व जस्टिस जा पहुंचे HC

याचिका में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश झा के आवास पर लगे कैमरे न्यायमूर्ति सोढ़ी के आवास के अंदर और बाहर आने वाले व्यक्तियों और वाहनों को उनके घर के सामने और बगल के हिस्से के साथ रिकॉर्ड कर सकते हैं। न्यायमूर्ति सोढ़ी ने तर्क दिया, "इस प्रकार यह सभी भारतीय नागरिकों को दिए गए निजता के अधिकार का उल्लंघन है।"

न्यायमूर्ति सोढ़ी ने यह भी दलील दी कि मुख्य न्यायाधीश अपने आवास और उच्च न्यायालय दोनों में सीआरपीएफ, चौबीसों घंटे संतरी और यात्रा करने वाले एस्कॉर्ट की तैनाती के माध्यम से अच्छी तरह से सुरक्षित हैं।

कर्नाटक और केरल हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एनके सोढ़ी ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस रवि शंकर झा के घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे को हटाने की मांग की है। इसको लेकर वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस रवि शंकर झा के घर के सामने रहते हैं। उन्होंने चंडीगढ़ में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए नियम बनाने का भी निवेदन किया है। जस्टिस सोढ़ी का कहना है कि चीफ जस्टिस के घर के सामने लगा कैमरा उनकी निजता भंग करता है।

जस्टिस सोढ़ी ने बताया कि कैमरा हटाने के लिए वे दो बार क्रमश: 22 मार्च औ 17 मई को पहले ही प्रतिनिधि भेज चुके हैं, लेकिन न हो चीफ जस्टिस झा और न ही हाईकोर्ट से कोई जवाब मिला। इसके बाद वे स्वयं हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं। याचिका में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश झा के आवास पर लगे कैमरे न्यायमूर्ति सोढ़ी के आवास के अंदर और बाहर आने वाले व्यक्तियों और वाहनों को उनके घर के सामने और बगल के हिस्से के साथ रिकॉर्ड कर सकते हैं। न्यायमूर्ति सोढ़ी ने तर्क दिया, “इस प्रकार यह सभी भारतीय नागरिकों को दिए गए निजता के अधिकार का उल्लंघन है जैसा कि केएस पुट्टुस्वामी बनाम भारत संघ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में निर्धारित किया गया था।

याचिका में कहा गया है, “इस माननीय न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश के आधिकारिक आवास पर हाई रिजल्यूशन सोफिस्टीकेटेड सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और उपयोग याचिकाकर्ता की निजता का सीधा उल्लंघन है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 25 और 28 के तहत एक मौलिक अधिकार है। यह एक बुनियादी मौलिक अधिकार है। और व्यक्तिगत गरिमा और गोपनीयता जुड़ी हुई है।”

न्यायमूर्ति सोढ़ी ने यह भी दलील दी कि मुख्य न्यायाधीश अपने आवास और उच्च न्यायालय दोनों में सीआरपीएफ, चौबीसों घंटे संतरी और यात्रा करने वाले एस्कॉर्ट की तैनाती के माध्यम से अच्छी तरह से सुरक्षित हैं। इसलिए किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरों की जरूरत नहीं है।

न्यायमूर्ति एनके सोढ़ी ने उच्च न्यायालय से मुख्य न्यायाधीश झा के आवास पर सीसीटीवी कैमरों को हटाने या स्थानांतरित करने का निर्देश देने और राज्य को चंडीगढ़ में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना को विनियमित करने के लिए नियम बनाने का निर्देश देने का आग्रह किया है।

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