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पंजाब: शक्ति प्रदर्शन में शामिल कई विधायकों पर सीआईडी की नजर! सीएम से मांगी थी मदद, अब हैं सिद्धू संग

आरोपी विधायकों ने इससे पहले सीएम अमरिंदर सिंह से अपने ऊपर चल रहे मामलों में मदद की गुहार लगाई थी, हालांकि वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इससे ये विधायक नए प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की तरफ हाथ बढ़ा दिए और उनके खेमे में खुलकर शामिल हो गए। खुद

स्वर्ण मंदिर में सिद्धू और उनके समर्थक। (फोटो- राणा सिमरनजीत सिंह इंडियन एक्सप्रेस।)

पंजाब में कांग्रेस की राज्य इकाई का संकट अभी नहीं है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और नए प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच जो टकराव पहले था, वह कायम है। इसी वजह से राज्य के कई विधायक जिनकी सीएम से नहीं बन रही है, वे अब सिद्धू की तरफ हाथ बढ़ा रहे हैं। इन विधायकों में से कई ऐसे हैं, जो कई गंभीर मामलों में आरोपी हैं और उन पर सीआईडी की नजर है।

नया पेंच यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद जब नवजोत सिंह सिद्धू बुधवार को मत्था टेकने स्वर्ण मंदिर अमृतसर गए थे, तब उनके साथ कई विधायक भी थे। बताया जा रहा था कि विधायकों की संख्या से उन्होंने अपना शक्ति प्रदर्शन किया है, लेकिन इनमें से कई ऐसे विधायक हैं, जिनके खिलाफ गंभीर मामलों में केस चल रहे है और कुछ सीआईडी के रडार पर हैं। उन पर अवैध खनन और शराब का धंधा जैसे मामले भी हैं। बाद में जब ये विधायक सिद्धू के घर पहुंचे तो वहां भी सीआईडी के अधिकारी सादे कपड़ों में मौजूद रहे।

आरोपी विधायकों ने इससे पहले सीएम अमरिंदर सिंह से अपने ऊपर चल रहे मामलों में मदद की गुहार लगाई थी, हालांकि वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इससे ये विधायक नए प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की तरफ हाथ बढ़ा दिए और उनके खेमे में खुलकर शामिल हो गए। खुद सीएम अमरिंदर सिंह ने पंजाब कांग्रेस का संकट हल करने के लिए बनाए गए तीन सदस्यीय पैनल को भी इन विधायकों की गतिविधियों के बारे में बताया था।

फिलहाल सीआईडी इन पर नजर बनाए हुए है। इनकी गतिविधियों और इनसे मिलने-जुलने वाले लोगों पर भी नजर रखी जा रही है। ऊपर से सब कुछ ठीकठाक बताया जा रहा है, लेकिन अब भी सीएम अमरिंदर सिंह और प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच मनमुटाव कायम है।

अगले साल के शुरू में ही पंजाब में विधानसभा का चुनाव है। ऐसे में इस संकट का जल्द निपटारा नहीं हुआ और पार्टी दो खेमों में बंटी रही तो उसका असर चुनाव पर जरूर पड़ेगा। हालांकि केंद्रीय नेता और पार्टी हाईकमान न तो सिद्धू को खोना चाहती है और न ही सीएम अमरिंदर सिंह को नाराज रखना चाहती है।

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