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फैलता शहर, डूबतीं सड़कें

नगर निगम चंडीगढ़ की वेबसाइट के अनुसार शहर में पानी की अधिकतम मांग लगभग 950 लाख गैलन प्रतिदिन है जबकि मात्र 640 लाख गैलन प्रतिदिन ही उपलब्ध है।

Author July 10, 2019 4:52 AM
पाइप लाइनों में रुकावटों का निरीक्षण किया जा चुका है।

मांडवी मिश्रा

चंडीगढ़ शहर का नाम सुनते ही एक नियोजित शहर का दृश्य आंखों के सामने आता है जहां अच्छी सड़कें, खूब हरियाली और मनमोहक मौसम होगा। पर इस शहर की एक त्रासदी यह है कि बारिश होते ही सड़कों पर जलभराव हो जाता है। शहर की एक और समस्या है पीने का पानी। जगह-जगह पर जल टैंकर खड़े दिखेंगे। पर ऐसा क्यों है? ली कारबूजिए ने पांच लाख की आबादी के लिए जिस चंडीगढ़ का नक्शा बनाया गया था, वहां आज 10 लाख से भी अधिक लोग रह रहे हैं। जैसे-जैसे इस जनसंख्या को स्थान देने के लिए शहर और कंक्रीट में तब्दील हुआ, वैसे-वैसे भूजल स्तर कम होता चला गया और मानसून आते ही सड़कों पर पानी भरना एक आम बात हो गई।

चंडीगढ़ नगर निगम के आयुक्त केके यादव ने तो लोगों से बारिश में भरी सड़कों पर कम निकलने की अपील करते हुए यह तक कह दिया कि बारिश लोगों का कार्य समय देखकर नहीं आती है। उन्होंने जलमग्न सड़कों से बचते हुए, ट्रैफिक का रुख बदलने का भी सुझाव दिया जिससे असुविधा न हो। उनका यह भी कहना है कि वह और उनकी बाढ़ नियंत्रण टीम कार्यरत है और जहां कहीं भी पाइप लाइनों में रुकावट की दिक्कत है, उन पर काम किया जा रहा है।

इसके विपरीत आम लोगों सड़कों पर भरे पानी से बहुत असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कई सालों से चंडीगढ़ में कैब चला रहे भूपेंदर सिंह का कहना है कि उनके लिए यात्रियों को ले जाने में बड़ी परेशानी होती है। जाम लगने के कारण पहुंचने में देर हो जाती है। जल निकास व्यवस्था में पाइप लाइनों की न सही पर चंडीगढ़ के तीन मुख्य चो (छोटा नाला)- सुखना चो, एन चो, व पटियाला की राओ चो को तो साफ रखने के लिए कदम उठाते हुए, उनका विस्तार कर उनकी क्षमता बढ़ाई जा सकती है। इसी विषय पर रोड डिवीजन 1 के कार्यकारी अभियंता अजय के गर्ग का कहना है कि जो एन-चो समेत अन्य चो हैं वे बाढ़ग्रस्त हो जाते हैं जिससे पानी निकल नहीं पाता। जब तक एन चो अपने मौलिक आकार में वापस नहीं आएगा, भराव बढ़ेगा क्योंकि साल दर साल विभिन्न कारणों से उसका जलग्रहण क्षेत्र कम हो रहा है। बढ़ती आबादी के साथ संबंधित प्राधिकरण को चो की सफाई और क्षेत्रफल बढ़ाने की आवश्यकता है।

पूर्व मेयर रह चुके अरुण सूध ने पाइप लाइनों को साफ करने के लिए सुपरसक्शन मशीनों को उपयोग में लाने का सुझाव दिया। हालांकि इस बात का दावा जरूर किया जा रहा है कि पाइप लाइनों में रुकावटों का निरीक्षण किया जा चुका है और अधिकतर को साफ किया जा चुका है। सेक्टर 17 बाजार में बारिश में फंसी अनुपमा कहती हैं कि सड़क पर पानी भरने से घर के बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

चंडीगढ़ में गहरे जलदायी स्तर से पानी की खपत उसके पुनर्भरण से कहीं ज्यादा है। नगर निगम चंडीगढ़ की वेबसाइट के अनुसार शहर में पानी की अधिकतम मांग लगभग 950 लाख गैलन प्रतिदिन है जबकि मात्र 640 लाख गैलन प्रतिदिन ही उपलब्ध है। चौथे चरण के का काम के पूरा हो जाने पर भी 785 लाख गैलन प्रतिदिन ही मुहैया कराया जा सकेगा। नगर निगम के मेयर राजेश कुमार कालिया ने बताया कि शहर के बुनियादी नक्शे में पाइप की क्षमता कम होने के कारण वह भारी बारिश के पानी को अंदर ले नहीं सकती। हम कई शहरों में बाढ़ की स्थिति देखते हैं, उनकी तुलना में चंडीगढ़ की स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने माना की जब चंडीगढ़ बना था तबसे ये पाइप नहीं बदले गए हैं। यहां आबादी भी कई गुना बढ़ गई है और लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे का वे स्वयं संज्ञान लेंगे।

शहर का मास्टर प्लान

चंडीगढ़ सरकार की वेबसाइट पर 2015 में साझा किए गए ‘चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031’ में पानी के भराव के निम्नलिखित कारण दिए गए हैं-
910 मिमी वार्षिक बरसात वाले शहर की जलनिकास व्यवस्था की बनावट मात्र 12 मिमी प्रति घंटा अधिक वर्षा की क्षमता रखती है।
शहरीकरण के कारण, एन-चो सिमटती जा रही है।
प्रदूषण से खुले नालों व चो में कचरा व मलबा डालना
अव्यवस्थित रूप से सर्विस लाइनों व सड़कों का निर्माण
आवासीय परियोजनाओं के लिए जलधाराओं के प्राकृतिक मार्ग में परिवर्तन।
यह बात विचार करने योग्य है कि चार वर्षों में क्या इन मुद्दों पर कार्य हुआ है?

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