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पति-पत्नी के बीच जबरन या अप्राकृतिक सेक्स तलाक का आधार- हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महिला द्वारा लगाये गये आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन इस घटना को पुष्ट करने वाले कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है क्योंकि "सोडोमी अथवा अप्राकृतिक सेक्स, या फिर ओरल सेक्स, जो कि जबरन तरीके से विषम परिस्थितियों में होते हैं" इन परिस्थितियों का ना तो कोई गवाह बन सकता है और ना ही इन्हें मेडिकल साक्ष्यों द्वारा सिद्ध किया जा सकता है।

Author June 8, 2018 2:51 PM
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट।

पंजाब और हरियाणा कोर्ट ने फैसला दिया है कि विवाह में ‘जबरन सेक्स’ या फिर ‘सेक्स के अप्राकृतिक जरिये को अपनाना और उसे अपने साथी पर थोपना’ तलाक लेने के लिए वैध आधार हैं। अदालत ने इसके साथ ही बठिंडा की एक महिला द्वारा तलाक के लिए दी गई अर्जी को स्वीकार कर लिया है। चार साल पहले एक निचली अदालत ने महिला की तलाक की याचिका को खारिज कर दिया था और कहा था कि ये महिला को साबित करना होगा कि उसके पति ने उसके साथ ओरल या फिर अप्राकृतिक सेक्स स्थापित किया था, तब कोर्ट ने फैसला दिया था कि इसे साबित करने के लिए कोई मेडिकल साक्ष्य मौजूद नहीं है। हालांकि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महिला द्वारा लगाये गये आरोप बेहद गंभीर हैं, लेकिन इस घटना को पुष्ट करने वाले कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है क्योंकि “सोडोमी अथवा अप्राकृतिक सेक्स, या फिर ओरल सेक्स, जो कि जबरन तरीके से विषम परिस्थितियों में होते हैं” इन परिस्थितियों का ना तो कोई गवाह बन सकता है और ना ही इन्हें मेडिकल साक्ष्यों द्वारा सिद्ध किया जा सकता है।

जस्टिस एमएम एस बेदी और जस्टिस हरिपाल वर्मा की खंडपीठ ने 1 जून को दिये अपने फैसले में कहा, “हमने पाया है कि याचिकाकर्ता महिला के दावे को गलत तरीके से ठुकरा दिया गया है। सोडोमी, जबरन संबंध स्थापित करना और सेक्स के लिए अप्राकृतिक साधनों का इस्तेमाल जो कि दूसरे साथी पर जबरन किये जाते हैं-इससे इतनी पीड़ा होती है कि पीड़ित पक्ष अलग रहने के लिए मजबूर हो जाता है और ये तथ्य शादी को खत्म करने के लिए इजाजत मांगने का निश्चित रूप से एक आधार होगा। अदालत ने अपने निष्कर्ष में पाया कि कोर्ट को ऐसे आरोपों को स्वीकार करने से पहले काफी सावधानीपूर्वक देखना चाहिए। अदालत की खंडपीठ ने कहा कि शादी को खत्म किया जा सकता है, यदि सबूतों या फिर हालातों के द्वारा ये प्रमाणित किया जा सके कि पति/पत्नी ने एक दूसरे के साथ अप्राकृतिक सेक्स किया है।

इस मामले में महिला ने साल 2007 में बिहार के एक शख्स के साथ शादी की थी। महिला ने कम्प्यूटर एप्लीकेशन में पीजी डिप्लोमा किया हुआ है। इन दोनों को एक लड़का भी था। रिपोर्ट के मुताबिक शादी में 4 लाख रुपये खर्च किये गये थे और कथित रूप से दहेज भी दिया गया था। महिला की याचिका के मुताबिक उसके परिवार को बताया गया था कि लड़का एक निजी कंपनी में इंजीनियर है, लेकिन बाद में यह भी झूठा निकला। महिला ने आरोप लगाया कि उसे उसके पति के परिवार के लोगों ने प्रताड़ित और तंग किया और कम दहेज लाने का ताना दिया। महिला ने कोर्ट में कहा कि उसके पति ने “उसकी मर्जी और उसकी सहमति के बिना उसके साथ जबरन सेक्स किया” और शराब पीने के बाद उसके साथ जबरन अप्राकृतिक यौनाचार किया।

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