पंजाब: जानिए उस गांव के बारे में जिस पर है ड्रग्‍स के मामले से सबसे ज्‍यादा FIR होने का रिकॉर्ड - Jansatta
ताज़ा खबर
 

पंजाब: जानिए उस गांव के बारे में जिस पर है ड्रग्‍स के मामले से सबसे ज्‍यादा FIR होने का रिकॉर्ड

यह गांव खेतों में मजदूरी करने वाले 'बेहद गरीब' लोगों का है, जिनमें से ज्‍यादातर अनुसूचित जाति राय सिख से आते हैं।

Author कपूरथला | June 8, 2016 1:37 PM
इस गांव के लोगों के खिलाफ 2014 में NDPS एक्‍ट के तहत 47 एफआईआर दर्ज की गई थीं। (Express Photo: Jaipal Singh)

पंजाब में पठानकोट हाइवे से दो किलामीटर दूर, कपूरथला के किनारे स्थित एक गांव ‘बूट’ पुलिस के उस मिशन का हिस्‍सा है जिसके तहत उन्‍होंने इस गांव से ‘ड्रग्‍स को पूरी तरह खत्‍म’ कर दिया है। इस गांव के लोगों के खिलाफ 2014 में NDPS एक्‍ट के तहत 47 एफआईआर दर्ज की गई थीं।

यहां ‘पर्चा’ सुनते ही लोगों के चेहरों पर खौफ नजर आने लगता है। पर्चा एफआईआर को कहते हैं। इसके अलावा ‘चित्‍ता’ शब्‍द का इस्‍तेमाल भी बहुत आम है, यह हेरोइन और स्‍मैक को मिलाकर बनाया गया पाउडर है।

The Indian Express ने 47 एफआईआर में नामजद लोगों में से कम से कम 10 के परिवारों का दरवाजा खटखटाया। यह लोग या तो जेल में हैं या जमानत पर बाहर हैं। इस दौरान टीम को करीब 10 लोग गलियों में लेटे हुए मिले, देखकर लग रहा था कि नशे में धुत हैं।

Read more: उड़ता पंजाब को सेंसर करने पर बोले राहुल गांधी, इससे खत्‍म नहीं होगी ड्रग्‍स की समस्‍या

इस बात से यहांं के लोकल पुलिस अधिकारी, सब इंस्‍पेक्‍टर रंजीत सिंह चकित नहीं होते। ना ही गांव के इकलौते स्‍कूल के टीचर्स, जहां करीब 900 बच्‍चे पढ़ते हैं। सबका कहना है कि यह गांव खेतों में मजदूरी करने वाले ‘बेहद गरीब’ लोगों का है, जिनमें से ज्‍यादातर अनुसूचित जाति राय सिख से आते हैं। यहां अशिक्षा एक बड़ी समस्‍या है और स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लिए लोग एक ‘टाइम पास डॉक्‍टर’ पर निर्भर हैं जो कि एक छोटे से कमरे में बिना किसी बोर्ड के क्लिनिक चलाते हैं।

Read more: Ground Report: आजाद घूम रहे ड्रग्स के कारोबारी, पर इस्तेमाल करने वालों पर है पंजाब पुलिस की पूरी सख्ती

एक अनाम दुकान के बाहर खड़े लोग कुछ अलग ही कहानी बताते हैं। उनके मुताबिक, पुलिस ने ‘गांव की गलत ब्रांडिंग’ कर दी है। उन्‍होंने निर्दोष लोगों को उठाया ताकि वे अपना मासिक लक्ष्‍य पूरा कर सकें। वे सिर्फ उन्‍हीं को पकड़ते हैं जो रिश्‍वत नहीं दे सकते। कुछ पुलिसकर्मी तो गांववालों के साथ मिलकर ड्रग्‍स लेते हैं।

Read more: पिछले दो साल में 12 बड़े नेताओं ने छोड़ा कांग्रेस का हाथ, पांच राज्‍यों में संकट से जूझ रही पार्टी

इस बारे में रंजीत सिंह कहते हैं, “हर विभाग में कुछ ऐसे लोग होते हैं। मैं नहीं कहता कि इसमें पुलिसकर्मी शामिल नहीं, लेकिन ड्रग्‍स लेने वालों की संख्‍या 4-5 प्रतिशत से ज्‍यादा नहीं होगी। मैंने यहां 19 अप्रैल को ज्‍वाइन किया था और गांव के सभी बड़े स्‍मगलरों को हमने सलाखों के पीछे पहुंचाया है।”

एसएचओ रंजीत सिंह के पास गांववालों के सवालों का जवाब है। वह कहते हैं, “2014 की 47 एफआईआर यह बताती हैं कि यहां की स्‍िथति क्‍या थी। कई वाकये ऐसे हैं जब आपराधिक आरोप झेलने वालों ने बदला लेने के लिए निर्दोषों के नाम लिए।”

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App