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आखिर सिद्धू ने बता ही दिया क्‍यों दिया था राज्‍यसभा से इस्‍तीफा, अब तक चुप थे दोनों पक्ष

गुरुवार की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने नए राजनीतिक मोर्चे ‘आवाज-ए-पंजाब’ की औपचारिक घोषणा की।
प्रेस कॉन्‍फ्रेंस को संबोधित करते नवजोत सिंह सिद्धू। (Source: ANI)

पंजाब में नई पार्टी बनाने का औपचारिक ऐलान करते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने राज्‍यसभा से इस्‍तीफे पर चुप्‍पी तोड़ी। विधानसभा चुनाव में ‘आवाज-ए-पंजाब’ पार्टी के जरिए ताल ठोंकने की तैयारी कर रहे सिद्धू से एक पत्रकार ने इस बारे में सवाल किया। प्रेस काॅन्‍फ्रेंस में उनसे पूछा गया कि क्‍या अरविंद केजरीवाल के कहने पर उन्‍होंने राज्‍यसभा से इस्‍तीफा दिया था। इसके जवाब में सिद्धू ने कहा- ”मैंने राज्‍यसभा इसलिए छोड़ी क्‍योंकि मुझे बादल परिवार के लिए प्रचार करने को कहा गया था। मैंने मना कर दिया। यह पूरे विवेक से लिया गया फैसला था। राज्‍यसभा से मेरे इस्‍तीफे में केजरीवाल जी का काेई लेना-देना नहीं।” गौरतलब है कि सिद्धू ने जुलाई में राज्‍यसभा से इस्‍तीफा दिया था।

भाजपा में 10 साल रहने के बाद अलग होने का फैसला करने वाले सिद्धू को लेकर दो महीने तक अटकलों का बाजार गर्म रहा। आम आदमी पार्टी में शामिल होने की संभावना के बीच न तो सिद्धू ने राज्‍यसभा इस्‍तीफे पर कुछ कहा, न ही भाजपा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आई। कई दिन तक तो यही साफ नहीं हो सका कि सिद्धू ने भाजपा छोड़ दी है या नहीं। अपनी प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में सिद्धू ने आम आदमी पार्टी पर डाेरे डालने का आरोप लगाया। सिद्धू ने कहा- ”केजरीवाल जी ने मुझसे मुलाकात के बारे में ट्वीट किया, लेकिन उन्‍होंने आधा सच बताया। मैं पूरी बात बताता हूं। केजरीवाल ने मुझसे पंजाब चुनाव न लड़ने को कहा। उन्‍होंने कहा, आप प्रचार कीजिए, अपनी पत्‍नी को लड़ाइए। वे (AAP) भोली सूरत दिल के खोटे, नाम बड़े और दर्शन छोटे।”

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गुरुवार की प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने नए राजनीतिक मोर्चे ‘आवाज-ए-पंजाब’ की औपचारिक घोषणा की। इस मौके पर सिद्धू ने कहा कि ”भारत में एक परंपरा रही है कि अच्‍छे लोगों को सजावट के सामान की तरह और सिर्फ प्रचार के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है।” उन्‍होंने कहा कि ‘आवाज-ए-पंजाब एक इंकिलाबी आवाज है।’

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  1. B
    Binay
    Sep 9, 2016 at 5:52 am
    सिंधुजी को टिकेट नहीं देने का एक कारन यह भी है की उन्हय कोर्ट से सजा भी मिली है जो सिंधुजी नहीं बोलना चाहते
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    1. M
      Manmohan Singh
      Sep 9, 2016 at 12:55 am
      जा के पैर न फ़टी बुआई वा क्या जाने पीड़ पराई। नवज्योत सिंह सिद्धू संपन्न परिवार से है और कामयाबी के शिखर पर है। चुनाव को मद्देनजर रख कर नयी पार्टी बनाना किस बात का संकेत है, कहना मुश्किल है। महत्वकांक्षी है, लेकिन जनाधार उसके पास नहीं है। केजरीवाल एक प्रकिर्या से गुजरा है और ईमानदारी से निस्वार्थ प्रयास कर रहा है, सिद्दू योग कर सकता था लेकिन अहंकार झुकने नहीं देता, तो नंबर दो होने में अड़चन थी। यह रोगी मानसिकता के लक्षण है।
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