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चुनावी समर में हारे, फिर अदाकारी को लगाया गले

कॉमेडियन गुरप्रीत सिंह घुग्गी ने बटाला, भगवंत सिंह मान ने जलालाबाद, मोहम्मद सद्दीक ने जैतों, सतविंद्र बिट्टी ने साहनेवाल और सूफी कलाकार अरशद डॉली ने मलेरकोटला से अपनी किस्मत आजमाई थी।

Author चंडीगढ़ | April 26, 2017 5:09 AM
कॉमेडियन से राजनीतिक बने गुरप्रीत सिंह घुग्गी सुच्चा सिंह छोटेपुर की जगह लेंगे।

संजीव शर्मा

हाल में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में जहां पारंपरिक नेताओं ने अपनी किस्मत आजमाई, वहीं इस चुनाव में कलाकार, खिलाड़ी, डॉक्टर व कई ऐसे नौकरशाह थे जिन्होंने चुनावी समर में अपने विरोधियों को कड़ी टक्कर दी, लेकिन जनता ने उन्हें नेता के रूप में स्वीकार नहीं किया। अब चुनाव जीतने वाले तो विधानसभा में पहुंच गए हैं और हारने वाले अपने पुराने कामकाज की तरफ लौट गए हैं। जनता, समाज की सेवा का खुमार पूरी तरह उतर चुका है।  इस बार जनता के आकर्षण व चर्चा का केंद्र कलाकार ही रहे हैं। कॉमेडियन गुरप्रीत सिंह घुग्गी ने बटाला, भगवंत सिंह मान ने जलालाबाद, मोहम्मद सद्दीक ने जैतों, सतविंद्र बिट्टी ने साहनेवाल और सूफी कलाकार अरशद डॉली ने मलेरकोटला से अपनी किस्मत आजमाई थी। इन कलाकारों में सबसे ज्यादा चर्चित भगवंत मान और गुरप्रीत घुग्गी रहे हैं।  आम आदमी पार्टी की ओर से संयोजक बनाए जाने के बाद गुरप्रीत घुग्गी इतना बदले कि उन्होंने अपना फिल्मी एवं रंगमंच का नाम बदल कर गुरप्रीत वड़ैच ही प्रचारित कर दिया था। चुनाव के दौरान आप की तरफ से गुरप्रीत वड़ैच ने पूरे पंजाब में प्रचार किया लेकिन उन्हें अपने हलके से महज 34 हजार 302 वोट मिले और वह तीसरे नंबर पर रहे।

परिणाम के बाद गुरप्रीत वड़ैच अब फिर से गुरप्रीत घुग्गी बन गए हैं। यही नहीं घुग्गी हाल ही में पंजाब सरकार की ओर से हुई सांस्कृतिक समिति की बैठक में भी शामिल हो चुके हैं। शायद वह इसी में अगली पारी की तैयारी में जुटे हैं।कुछ ऐसी ही स्थिति कांग्रेस नेता मोहमद सद्दीक की है। सद्दीक इस चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे और उन्हें 35 हजार 351 वोट मिले। हालांकि सद्दीक ने विधायक रहते हुए कभी भी अखाडेÞ लगाने बंद नहीं किए। इसके बावजूद चुनावी समर में सद्दीक ने सियासत को अधिक वक्त दिया। सद्दीक की गिनती पंजाब के उन कलाकारों में होती रही है जिन्होंने तवे और तुंबी के बीच मेल बिठाया था। चुनाव परिणाम से भले ही कांग्रेस पार्टी की सरकार बन गई है लेकिन सद्दीक अभी तक कहीं समायोजित नहीं हुए हैं। लिहाजा उन्होंने फिर से अपने भीतर के कलाकार को तरजीह दी है। भगवंत मान विधायक तो नहीं बन सके लेकिन वह फिर सांसद की भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि भगवंत मान अपने भाषणों के से तो गुदगुदी पैदा करते रहे हैं, लेकिन सांसद बनने के बाद उन्होंने फिल्मी पर्दे से दूरी बनाई हुई है। कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़कर हारने वाली सतविंदर कौर बिट्टी और मलेरकोटला से चुनावी रण में उतरे सूफी कलाकार अरशद डॉली चुनाव परिणाम के बाद सक्रिय राजनीति से दूर होकर पुरानी दिनचर्या में सक्रिय हो गए हैं।

 

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