Government changed but drug dealer not finished - पंजाब: सरकार बदल गई, पर खत्म नहीं हुए नशे के सौदागर - Jansatta
ताज़ा खबर
 

पंजाब: सरकार बदल गई, पर खत्म नहीं हुए नशे के सौदागर

पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य होगा, जहां पहली बार नशे के मुद्दे पर न केवल चुनाव लड़ा गया बल्कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन तक हो गया। ड्रग्स के मामले पर सरकार तो बदल गई पर न तो ड्रग्स तस्करी में कोई कमी आई है और न ही पंजाब की धरती से नशा खत्म हुआ है।

Author चंडीगढ़। | August 8, 2018 4:54 AM
अमरिंदर सिंह की सरकार को सत्ता में आए एक साल से अधिक समय हो चुका है लेकिन पंजाब को नशा मुक्त करने के उनके दावे हवा होते नजर आ रहे हैं।

संजीव शर्मा

पंजाब देश का पहला ऐसा राज्य होगा, जहां पहली बार नशे के मुद्दे पर न केवल चुनाव लड़ा गया बल्कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन तक हो गया। ड्रग्स के मामले पर सरकार तो बदल गई पर न तो ड्रग्स तस्करी में कोई कमी आई है और न ही पंजाब की धरती से नशा खत्म हुआ है। आलम यह है कि नशे का अधिक मात्रा में सेवन करने से प्रदेश में 33 दिन के भीतर 47 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके चलते वर्तमान अमरिंदर सरकार सवालों के घेरे में है। पंजाब में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव का मुख्य मुद्दा राज्य को नशा मुक्त करने का था। इस मुद्दे को सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने तरीके से भुनाया। विधानसभा चुनाव जब पूरे चरम पर थे तो वर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाथ में गुटका साहिब (गुरु ग्रंथ साहिब का छोटा स्वरूप) पकड़ कर राज्यस्तरीय रैली में कसम खाई थी कि अगर पंजाब की जनता उन्हें सत्ता सौंपती है तो वह चार सप्ताह के भीतर नशे को जड़ से खत्म कर देंगे।

अमरिंदर सिंह की सरकार को सत्ता में आए एक साल से अधिक समय हो चुका है लेकिन पंजाब को नशा मुक्त करने के उनके दावे हवा होते नजर आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि चुनाव से पहले कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी जहां खुलेआम नशे के कारोबार के लिए तत्कालीन अकाली मंत्रियों को दोषी करार देते हुए सत्ता में आते ही उन्हें जेलों में ठूंसने की बात करती थीं। वहीं, आज कैप्टन अमरिंदर सिंह साफ कर चुके हैं कि बिक्रमजीत सिंह मजीठिया समेत अन्य अकाली नेताओं के विरुद्ध जब तक ठोस सबूत नहीं मिलेंगे, तब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। एक तरफ पंजाब की कांग्रेस सरकार अपने ही दावों में उलझ रही है। वहीं, एक माह में नशे की अधिक मात्रा लेने के कारण 47 लोगों की मौत हो चुकी हैं। नशे के कारण मौत का यह सिलसिला लगातार जारी है और राज्य सरकार अभी तक इस मामले का ठोस समाधान नहीं कर सकी है।

पंजाब सरकार द्वारा सत्ता में आने के बाद नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए गठित की गई एसटीएफ के भी आशातीत परिणाम जनता के सामने नहीं आ रहे हैं। एक माह के दौरान पंजाब के विभिन्न शहरों में हुई मौत के बाद इस बात के संकेत मिले हैं कि सीमावर्ती जिलों में तो नौजवान नशे के लिए उन दवाइयों का इस्तेमाल करने लगे हैं जिनका इस्तेमाल नशा छुड़ाने के लिए किया जाता है। यही नहीं राज्य के बड़े हिस्से में कट ड्रग के नाम से एक नए नशे की आपूर्ति होने लगी है जो हेरोइन या स्मैक के मुकाबले सस्ता लेकिन जानलेवा है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी पंजाब सरकार के दावों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। एनसीबी के सहायक निदेशक का तर्क है कि पिछले साल जहां बीएसएफ और अन्य एजंसियों ने 190 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी थी। वहीं, इस साल केवल मई तक यह आंकड़ा 200 किलोग्राम तक पहुंच चुका है। इसका मतलब साफ है कि पंजाब में ड्रग्स की आपूर्ति में कोई कमी नहीं आई है।

पंजाब सरकार का दावा है कि मार्च 2017 में प्रभार संभालने के बाद अब तक कुल 18800 नशा तस्कर गिरफ्तार किए गए और 16305 मामले दर्ज किए गए। इस अवधि के दौरान 377.787 किलोग्राम हेरोइन, 116.603 किलोग्राम चरस और 14.336 किलोग्राम स्मैक पकड़ी गई है।

कैंसर की तरह युवाओं को खत्म कर रहा है नशा

पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता सुखपाल सिंह खैहरा का मानना है कि पिछले दस साल तक अकाली सरकार ने पंजाब को नशों की तरफ धकेलने का काम किया है। प्रदेश में सरकार भले ही बदल गई है कि लेकिन ड्रग्स तस्करी की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है। पंजाब में पहले के मुकाबले अधिक युवाओं की मौत हो रही है। पंजाब में नशा अब कैंसर की तरह युवाओं को खत्म कर रहा है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह की सफाई

पंजाब में विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा घेराव किए जाने के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मुद्दे पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग कई ऐसे लोग हैं जो सरकार की मुहिम में रोड़े अटकाने का काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों की शिनाख्त हो चुकी है और लगातार कार्रवाई की जा रही है। नशा विरोधी अभियान तभी सिरे चढ़ेगा, जब लोग इसके विरुद्ध आंदोलन खड़ा करेगी। इसके खात्मे के लिए जनता के सहयोग की जरूरत है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App