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कांग्रेसी विधायक ने ‘सरबत खालसा’ में शामिल होने का किया बचाव

‘सरबत खालसा’ में शामिल होने को लेकर पंजाब में सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन के निशाने पर आये खदूर साहिब से कांग्रेस के विधायक..
Author चंडीगढ़ | November 13, 2015 00:53 am

‘सरबत खालसा’ में शामिल होने को लेकर पंजाब में सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन के निशाने पर आये खदूर साहिब से कांग्रेस के विधायक रमनजीत सिंह सिक्की ने गुरुवार को अपने कदम का यह कहते हुए बचाव किया कि वह अपनी पार्टी का रुख सामने रखने के लिए जमावड़े में गए थे। सिखों के जमावड़े ‘सरबत खालसा’ का आयोजन अमृतसर के बाहरी इलाके में सिख कट्टरपंथियों द्वारा 10 नवम्बर को किया गया था।

उन्होंने यहां जारी एक बयान में कहा, ‘‘एक धर्मनिष्ठ सिख के तौर पर मुझे मेरे समुदाय के किसी धार्मिक जमावड़े में शामिल होने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है और मैं यह बर्दाश्त नहीं कर सकता कि मैं अपने धर्म और आस्था के साथ जो करता हूं उसमें कोई हस्तक्षेप करे।’’

सिक्की ने धार्मिक ग्रंथ के अनादर की घटनाओं का विरोध करते हुए पिछले महीने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन विधानसभाध्यक्ष ने उसे तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया था। कांग्रेसी विधायक ने कहा कि ‘सरबत खालसा’ सभी के लिए खुला हुआ था चाहे कोई किसी भी पार्टी का हो।

उन्होंने कहा, ‘‘केवल इसलिए कि सत्ताधारी अकाली..भाजपा गठबंधन के नेताओं में इसमें शामिल होने का साहस नहीं था, इसका यह मतलब नहीं कि कांग्रेस के नेताओं को भी इसमें शामिल नहीं होना चाहिए था।’’

उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कमल शर्मा के बयान का उल्लेख किया कि जिसमें कहा गया था कि उन्हें ‘सरबत खालसा’ में शामिल नहीं होना चाहिए था, सिक्की ने कहा कि वह कांग्रेस पार्टी का रुख सामने रखने गए थे जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक रखा।

सिक्की ने कहा, ‘‘मैंने पार्टी का धर्मनिरपेक्ष रूख वहां रूपष्ट रूप से रखा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इसके साथ ही शांति और साम्प्रदायिक सौहार्द की अपील की और चेतावनी दी कि पंजाब में विभिन्न समुदायों एवं जातियों के बीच कोई विश्वास भंग नहीं होना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘न ही सिखों को किसी के शत्रु के तौर पर देखा जाना चाहिए न ही किसी अन्य को सिखों के शत्रु के तौर पर देखा जाना चाहिए, जिसकी सभी लोगों ने प्रशंसा की।’’

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